जबलपुर में किराये का अवैध कारोबार चरम पर
वैधानिक एग्रीमेंट के बिना किराए पर चल रहे मकान-दुकान,
अनाप-शनाप वसूली से जरूरतमंद परेशान
जबलपुर शहर में किराया वसूली का अवैध कारोबार दिन-ब-दिन बेकाबू होते जा रहा है। मकान, दुकान और कमर्शियल बिल्डिंग मालिक बिना किसी वैधानिक एग्रीमेंट के मनमाना किराया वसूल रहे हैं। 5 हजार रुपए किराये वाली संपत्ति को 25 हजार तक बता दिया जाता है, जिससे आम नागरिक आर्थिक बोझ के तले दबते जा रहे हैं।
न कोई रजिस्ट्रेशन, न कोई निगरानी
किराए पर चल रही प्रॉपर्टियों का न तो नगर निगम के पास कोई रजिस्टर है, न पुलिस विभाग के पास कोई एंट्री। यहां तक कि किरायेदार कौन है, कहां से आया है—इसकी कोई आधिकारिक जानकारी कहीं दर्ज नहीं होती। यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
अवैध गतिविधियों को बढ़ावा
जानकारों के मुताबिक, इस लापरवाही के चलते कई अवैध गतिविधियां भी फल-फूल रही हैं। बाहरी राज्यों से लोग आकर ऊंचे किराए पर मकान-दुकान ले रहे हैं, लेकिन उनकी सत्यापन प्रक्रिया तक नहीं हो रही। इससे चोरी, ठगी और अन्य आपराधिक घटनाओं की संभावना बढ़ रही है।
प्रशासन मौन क्यों?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन-प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा है। न नगर निगम, न पुलिस विभाग और न ही अन्य जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कोई कार्रवाई कर रहे हैं। परिणामस्वरूप किराया वसूली का यह अवैध खेल बिना रोक-टोक जारी है।
जनता की मांग
नागरिकों ने शासन से मांग की है कि—
हर किराये के मकान/दुकान का अनिवार्य एग्रीमेंट और रजिस्ट्रेशन हो।
पुलिस द्वारा किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया लागू की जाए।
किराया निर्धारण पर नियंत्रण के लिए निगरानी समिति बनाई जाए।
अवैध रूप से किराया वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जबलपुर शहर में यह अव्यवस्था और बड़ी समस्या का रूप ले लेगी।