गौरक्षा जागरण यात्रा एवं दिव्य महादरबार का मंडला में समापन बृजबिहारी सरकार ने कहा गाय को मिले राष्ट्र माता का दर्जा

रेवांचल टाईम्स – मण्डला परम पूज्य बृजबिहारी अनिकेत कृष्णा शास्त्री जी महाराज का आगमन 28 अगस्त को महिष्मति नगरी में हुआ था। भक्तों ने महाराज श्री का स्वागत महाराजपुर पौंडी में पुष्पमाला से किया और यहां से भव्य शोभायात्रा निकाली गई जो नगर भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल वृंदावन गार्डन बिंझिया पहुंची। 90 दिवसीय गौरक्षा जागरण यात्रा का आयोजन कर रहे बृजबिहारी अनिकेत कृष्णा शास्त्री जी ने यात्रा का मंडला में समापन किया और यहां पर दिव्य महादरबार का आयोजन हुआ। भक्तों से 11 लौंग बिना फूलवाली अर्पण कराते हुए परम पूज्य बृजबिहारी सरकार ने भक्तों की समस्याओं का निदान करते हुए उनकी जिज्ञासा का समाधन किया। इस अवसर पर बृजबिहारी अनिकेत कृष्णा शास्त्री जी ने धर्मप्रेमियों से कहा कि गौमाता को राष्ट्र माता घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 90 दिवसीय गौरक्षा जागरण यात्रा का उद्देश्य गौमाता की सुरक्षा रक्षा और सम्मान है। उन्होंने बताया कि जिस तरह गौ हत्या गौ तस्करी हो रही है यह चिंतन का विषय है। वहीं धर्मपरिर्वन भी समाज को विनाश की ओर धकेल रहा है। महिष्मति नगरी का आध्यात्मिक वातावरण उस समय भक्तिभाव से सरोबार हो उठा जब परम पूज्य बृजबिहारी अनिकेत कृष्णा शास्त्री महाराज का नगर में दिव्य आगमन हुआ। वहीं ब्रज बिहारी सरकार ने मां नर्मदा के पूजन के लिए पंच चौंकी महाआरती में सहभागिता दर्ज कराई और यहां पर मां नर्मदा की भव्य महाआरती कर आर्शीवाद लिया। वहीं भक्तों ने उनका जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया। महाराज श्री ने अपने पावन आशीर्वचन में कहा कि गाय केवल भारतीय संस्कृति की आत्मा ही नहीं बल्कि मानवता की आधारशिला है। उसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। उन्होंने गौरक्षा को धर्म संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए लोगों से संकल्प कराया कि समाज में गौमाता की सेवा और संरक्षण हेतु सभी सक्रिय भागीदारी निभाएं। इस दिव्य दरबार की सबसे विशेष झलक तब देखने को मिली जब भक्तजनों से महाराज श्री ने 11 लौंग बिना वाली लेते हुए उनकी समस्याओं का समाधान बताया। भक्तजन अपनी-अपनी परेशानियां सुनाकर जब समाधान पाते तो उनके चेहरे पर अविश्वसनीय आश्चर्य और अपार खुशी झलकने लगी। यह क्षण श्रृद्धालुओं के लिए अलौकिक और अविस्मरणीय बन गया। कार्यक्रम स्थल वृंदावन गार्डन में भक्तों की इतनी भीड़ उमड़ी कि पूरा परिसर मंत्रोच्चार, भजन और जयकारों से गूंज उठा। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी के चेहरे पर आस्था और आनंद की चमक देखी गई। परम पूज्य बृजबिहारी अनिकेत कृष्णा शास्त्री जी महाराज ने कहा कि गौ सेवा ही परम सेवा है और जब तक हमारी संस्कृति में गोरक्षा का संकल्प जीवित रहेगा तब तक भारत विश्व में आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बना रहेगा। उन्होंने गौरक्षा को लेकर कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की धरोहर है। जिस घर-गांव में गौ माता का वास होता है वहां सदैव सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। गौ माता केवल दुग्धदायिनी ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता के पोषण का आधार हैं। आज आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर गौरक्षा के लिए जागरूक हों और समाज में संदेश दें कि गाय हमारी माता है उसकी सेवा करना ही सच्ची उपासना है। महाराज श्री ने स्पष्ट कहा कि जिस दिन समाज ने गौ माता की रक्षा का संकल्प पूरी निष्ठा से ले लिया उसी दिन भारत विश्वगुरु बनने के मार्ग पर और तेजी से अग्रसर होगा। उन्होंने गौ माता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गौ माता का प्रत्येक अंग हमारे लिए कल्याणकारी और जीवनदायी है। गौधन ही वास्तविक धन है और यही भारतीय संस्कृति का आधार रहा है। महाराज श्री ने बताया कि गौमूत्र औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है और कई असाध्य रोगों में लाभकारी माना गया है। गोबर से बने कंडे और खाद खेतों को उर्वरक बनाने के साथ-साथ पर्यावरण को भी शुद्ध करते हैं। गाय का दूध, दही, घी और मक्खन न केवल शरीर को बल और ऊर्जा देते हैं बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होते हैं। गाय की पीठ पर हाथ फेरने और उसके पास बैठने से मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि गौ माता केवल जीव नहीं बल्कि चराचर जगत की आराध्या शक्ति हैं। उनके अंग-अंग में देवताओं का वास बताया गया है। इसलिए गोरक्षा केवल धार्मिक कर्तव्य ही नहीं बल्कि मानवीय दायित्व भी है।