छात्रावास अधीक्षक पूजा डोगरों को हटाओ बच्चों का जीवन बचाओ अधीक्षक का जम का किया जा रहा विरोध ग्रामीण कर रहें जाच की माँग

रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले में स्कूल व्यवस्था हो छात्रावास व्यवस्था सब मे दीमक की तरह जिम्मेदार शिक्षक और अपने निजी स्वार्थ सिद्ध करने गरीब बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में डाका डाल रहे है और अपना घर भर रहे है और जब इनकी जानकारी मीडिया या सार्वजनिक स्तर पर वाहर आती है उन्हें पहले जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा पर्दा डाल दबाया जाता है और जब मामला शांत नही होता है फिर राजनीति के जिम्मेदार स्थानीय सहित वरिष्ठ शिक्षक सहित अधिकारी यो पर अपना राजनीतिक रौब दिखया कर मामंले को शांत किया जाने की कोशिश की जाती हैं जिस कारण से आज सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाएं पर जम कर भ्रष्टाचार ग़बन किया जा रहा है और सरकारी धन को अपनी बकैती समझ लूट मंचा रखी हुई हैं।और जिला प्रशासन से लेकर विधायक सासंद सब इनके संरक्षण में खड़े देखे जा सकते हैं क्योंकि ये भ्रस्टो से इन्हें कुछ न कुछ स्वर्थ सिद्ध होता नजर आ रहा है पर अब जनता जगरूक हो चुकी ओर ऐसे भ्रस्टो के खिलाफ़ आवाज उठा रही है और धरना प्रदर्शन की तैयारियां में जुट रही हैं।।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों जिले के छात्रावासों में जम के भ्रष्टाचार और अधीक्षकों की मनमानी की जानकारी निकल कर सामने आ रही हैं।
जिले के छात्रावासों में जम के हो रही है लापरवाही
वही मंडला जिले के विकास खंड मवई के संकुल मोतीनाला में संचालित आवसीय बालिका छात्रावास खलोड़ी के अधीक्षक की दबगाई से बच्चे तो बच्चे उनके परिजन भी परेशान हो चुके है और जब से छात्रावास में पदस्थ हुई है तब से बच्चों में अपना धौस बता रही है और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में अपना हक बता कर लोगो के सामने उन्हें राजनीति संरक्षण होना का प्रचार प्रसार कर रही है और जो इनकी शिकायत करता है उन्हें एस टी एस सी एक्ट में फसने की धमकियां दी ड़ालती है और इन पर कोई कार्यवाही या निरीक्षण न हो इसके पहले ही तरह तरह के बहाने और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर आरोप लगाकर स्वयं बचने की कोशिशें करती हैं।
राजनीति संरक्षण के चलते मिला छात्रावास का प्रभार
वही हाल में ही स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां पूरा देश आज़ादी का जश्न मना रहा था, वहीं मंडला जिले के खलौड़ी स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया जहाँ ग्रामीणों ने छात्रावास अधीक्षक पूजा डोंगरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 15 अगस्त को आमंत्रित ग्रामीणों को कीड़े लगे गुड़ से बनी चाय परोसी। इस घटना का खुलासा एक तेजी से सोसल मीडिया में वायरल वीडियो से हुआ, जिसमें अधीक्षक अपने कर्मचारियों से कहती हुई सुनाई दे रही हैं ग्रामीणों को कीड़े वाले गुड़ की चाय ही पिलाओ और मेरे लिए दूसरी चाय बनाना।
छात्रावास अधीक्षक पर पहले भी लग चुके है गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि कीड़े लगे गुड़ से बनी चाय पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। कुछ लोगों को उल्टियां हुईं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने पर उन्हें चिकित्सकीय सलाह लेनी पड़ी। इस घटना से ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी व्याप्त है। उनका कहना है कि अगर ग्रामीणों के साथ अधीक्षक का यह रवैया है, तो छात्रावास की बालिकाओं को परोसे जाने वाले भोजन और पेय की गुणवत्ता की कल्पना करना कठिन नहीं है।
वही ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी लापरवाही अधीक्षक छात्रावास में रह रही बच्चोंयो के स्वास्थ्य और भविष्य को खतरे में डाल सकती हैं। वही ग्रामीणों का कहना है साफ है कि हमारी बच्चों का भविष्य और स्वास्थ्य किसी भी हाल में हम खतरे में डाला जा सकता ओर उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी ही है कि ऐसे भ्रष्ट लापरवाह पर जाँच करते हुए दोषी अधीक्षक पर शीघ्रता से कार्यावाही नही की गई तो उन्हें आंदोलन का रुख अपनाया पड़ सकता हैं।
अधीक्षक ने दी सफाई अपने ऊपर लगे आरोप पर
वही इस मामले पर छात्रावास अधीक्षक पूजा डोंगरे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गुड़ खराब था, जिस कारण बाद में दूसरा गुड़ और शक्कर मंगाकर चाय बनाई गई। उन्होंने वायरल वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेंश करने की बात कही है। हालांकि ग्रामीण अधीक्षक की इस सफाई को मानने को तैयार नहीं हैं और उनका कहना है कि अगर गुड़ खराब था तो शुरुआत से ही उसका उपयोग क्यों किया गया? घटना के बाद अब प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। मामले ने तूल पकड़ लिया है शिक्षा विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वह मामले की जांच कर शीघ्र ठोस निर्णय लेगा। बालिकाओं के अभिभावकों ने भी कहा कि अधीक्षक पर लगे आरोप गंभीर हैं और ऐसे में छात्रावास की बच्चियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए दोषी पाए जाने पर अधीक्षक को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों में जम के है आक्रोश
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि ग्रामीणों और छात्रावास की बच्चियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उनका कहना है कि ऐसी सोच रखने वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी के पद पर बनाए रखना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र अवसर पर सामने आया यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग है कि इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में छात्रावासों में रहने वाली बालिकाओं का स्वास्थ्य और भविष्य सुरक्षित रह सके। अगर जल्द स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन ऐसे लापरवाह अधीक्षक पर जॉच कर कार्यावाही नही करता है तो हम इसके लिए आंदोलन भी करेंगे पर ये बरदास्त नही करेंगे