आत्म साधना से परिपूर्ण दशलक्षण पर्व का समापन क्षमा वाणी के साथ हुआ..
रेवांचल टाईम्स – मंडला व्रती नगरी पिंडरई में युगश्रेष्ठ आचार्य भगवन् श्रीविद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्रीसमयसागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से परम पूज्य मुनिश्री नीरजसागर जी एवं परम पूज्य मुनिश्रीनिर्मदसागरजी महाराज के चल रहें चातुर्मास के मध्य आत्म साधना से परिपूर्ण दशलक्षण पर्व समापन क्षमा वाणी के साथ हुआ.. दशलक्षण पर्व जैन धर्म का शाश्वत पर्व हैं। सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष चौधरी कैलाश चंद्र जैन नें बताया कि इस वर्ष मुनिद्वय के मंगल सानिध्य में उनकी प्रेरणा से समाज के प्रत्येक सदस्य ने दशलक्षण पर्व का वास्तविक महत्व को समझते हुए आत्मा की साधना की और अपनी-अपनी कषायों का शमन करते हुए क्षमावाणी पर्व मनाया, नवयुवक मंडल के अध्यक्ष पीयूष सराफ ने जानकारी दी कि व्रती नगरी के इतिहास में प्रथम बार इस तरह की साधना और आनंद के साथ पर्व के दौरान सभी धर्म ध्यान किया, क्षमा वाणी पर्व के उपलक्ष्य में भट्टे जी परिवार की ओर से समाज का स्वल्पाहार कराया गया, चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष श्रीमान मनीष जैन ने समाज का एवं विशेष रूप से अपनी कमेटी के सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त किया.. सभी के सहयोग से दस दिनों का यह महा अनुष्ठान धर्म ध्यान पूर्वक सम्पन्न हुआ। उक्त समस्त जानकारी साधु सेवा समिति के मिडिया प्रभारी ऋषभ जैन ने पत्रकारों तक पहुंचाई।