ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला, फर्जी बिलों से किए जा रहे लाखों के भुगतान

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बगैर सरपंच-सचिव के हस्ताक्षर, बिना तारीख और बिना जीएसटी नंबर के लगाए गए फर्जी बिलों पर हो गया भुगतान
रेवांचल टाइम्स मंडला जनपद बिछिया की ग्राम पंचायत बंजी में एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है, जहाँ पंचायत के खाते से लाखों रुपए के बिलों का भुगतान ऐसे दस्तावेजों के आधार पर कर दिया गया जिन पर न तो सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर हैं, न ही कोई दिनांक अंकित है, कई बिल तो धुंधले लगाये गए जो स्पष्ट नही दिखाई दे रहे है और न ही आवश्यक कर जानकारी जैसे जीएसटी नंबर दर्ज नही है। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता को उजागर करता है, बल्कि पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फर्जी बिलों की भरमार
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत में पिछले कुछ महीनों से एक के बाद एक ऐसे बिल पास किए जा रहे हैं, जो न तो निर्धारित प्रारूप में हैं और न ही उनके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न हैं। इन बिलों में जिन कंपनियों या दुकानों के नाम से सामग्री सप्लाई या निर्माण कार्य का दावा किया गया है, उनमें से कुछ का कोई पंजीकरण रिकॉर्ड तक नहीं है। कुछ बिलों पर जीएसटी नंबर तक अंकित नहीं है, जिससे स्पष्ट होता है कि वे फर्म या व्यापारी जीएसटी पंजीकृत भी हैं या नही
इसके अलावा, अधिकांश बिलों पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं, जो कि किसी भी भुगतान की प्रक्रिया में अनिवार्य माने जाते हैं। दस्तावेज़ों की जाँच करने पर यह भी सामने आया कि कई बिलों पर तारीख ही दर्ज नहीं है, जिससे यह प्रमाणित करना असंभव हो जाता है कि बिल कब बना और किस कार्य के लिए था।
विक्रेता राहुल कुर्मी दिनांक 31/8/25 बिल नं 354 इक्कीस हजार का धुंधला बिल विक्रेता अवनी हार्डवेयर एवं प्लाई माईका सेंटर अंजनिया बिना दिनांक बगैर सरपंच सचिव की सील बगैर हस्ताक्षर बिना दिनांक लिखे 99990 हजार का भुगतान किया गया अवनी हार्डवेयर बिना दिनांक बिना पंचायत की सील बिना हस्ताक्षर के 22160 रु का भुगतान विक्रेता श्रद्धा ट्रेडर्स अहमदपुर भीकम लाल साहू बिल नं 64 बिना जी एस टी के 36142 का भुगतान विक्रेता कबीर ट्रेडर्स विनोद झरिया 85350 रुक धुंधला बिल लगाया गया है पंचायत में ऐसे दर्जनों बिल लगाकर राशि का भुगतान किया गया है
नियमानुसार अनिवार्य हैं हस्ताक्षर और तारीख
पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत किसी भी प्रकार के भुगतान से पूर्व संबंधित कार्य का सत्यापन करना, बिल पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर लेना और दिनांक अंकित करना आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, जिन विक्रेताओं या ठेकेदारों से सामग्री ली जाती है, उनके पंजीकरण प्रमाण पत्र, पैन नंबर और जीएसटी नंबर भी संलग्न होने चाहिए। इन सभी मानकों की अनदेखी कर पंचायत द्वारा की गई भुगतान प्रक्रिया सीधे तौर पर वित्तीय भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती है।
न ही पंचायत समिति को जानकारी, न ही ग्रामीणों को
इस पूरे मामले की सबसे चिंताजनक बात यह है कि पंचायत के अधिकांश सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों को इस प्रकार के भुगतानों की कोई जानकारी नहीं है। ग्राम सभा की बैठकें या तो आयोजित नहीं की गईं या फिर बिना बैठक के औपचारिक रूप से आयोजित कर ली गईं। ग्राम सभा के अनुमोदन के बिना ही फर्जी बिल पास कर देना पंचायत अधिनियम का खुला उल्लंघन है।
लोक सेवकों की मिलीभगत की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि इस घोटाले में कुछ पंचायतकर्मियों के साथ-साथ संबंधित तकनीकी सहायक की भी मिलीभगत हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिना तकनीकी स्वीकृति और लेखा सत्यापन के कोई भुगतान संभव नहीं होता। फिर भी फर्जी बिलों पर भुगतान हो रहा है,

मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही फर्जी बिलों के माध्यम से किए गए समस्त भुगतानों की वसूली की भी की जाए।
अगर जिला स्तर पर पंचायत की ऑडिट कराई जाए, तो लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितताएँ सामने आ सकती हैं। यह जनता का पैसा है, इसे इस तरह लूटा नहीं जा सकता।”

ऐसे घोटाले न केवल आर्थिक नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि आम जनता का स्थानीय प्रशासन पर से विश्वास भी उठता जा रहा है। जब जनता यह देखती है कि उनके गाँव में कोई विकास कार्य नहीं हो रहा, फिर भी सरकारी धन खर्च हो रहा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करता है।
ग्राम पंचायत बंजी में सामने आया यह फर्जी बिल घोटाला एक गंभीर चेतावनी है कि यदि समय रहते पंचायतों की निगरानी व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुँच पाएगा।
जब ग्राम पंचायत बंजी सचिव से उनका पक्ष जानना चाहा तो सचिव के द्वारा फोन रिसीव नही किया गया ।

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