कॉलेज में जबरन ताला बंद, बाहरी व्यक्तियों की अवांछित गतिविधियों पर होगी कार्यवाही, छात्रों ने सौपा ज्ञापन
गुरु का पुतला दहन – क्या यही ABVP के संस्कार हैं?

रेवाँचल टाईम्स – मंडला जिले के नैनपुर तहसील में एकमात्र शासकीय स्नातक महाविद्यालय में मंगलवार को कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा जबरन ताला बंद कर छात्रों को कॉलेज में प्रवेश करने से रोकने की घटना सामने आई। इस दौरान छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई और वातावरण में तनाव की स्थिति बनी।मामले में तूल जब पकड़ा तब अखिल भारतीय विधार्थी परिषद ने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिये जबरन प्राचार्य के ऊपर दबाव बनाया जा रहा था, तो कहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को कॉलेज में बुलाकर राजनीति करवाया जा रहा था जिसका विरोध गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन शुरू से ही कर रहा था लेकिन एकाएक अखिल भारतीय विधार्थी परिषद ने प्राचार्य का ही पुतला जला डाला | शिक्षा देने वाले गुरु का पुतला जलाना न सिर्फ भारतीय संस्कृति के खिलाफ है बल्कि यह गुरु-शिष्य परंपरा पर भी गहरा प्रहार है। हाल ही में ABVP द्वारा किए गए इस कृत्य को लेकर छात्रों और संगठनों में गहरा आक्रोश है। गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन एवं अन्य छात्र संगठनों ने कहा कि गुरु को अपमानित करना शिक्षा और संस्कार दोनों की अवहेलना है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यही ABVP की सोच और संस्कार हैं? छात्रों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मांग की है कि शिक्षा संस्थानों में राजनीति के नाम पर इस तरह की असंस्कारी परंपराओं को रोका जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए | वही महाविद्यालय प्रशासन ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कॉलेज परिसर में बाहरी व्यक्तियों की अवांछित गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रों ने संबंधित प्रकरण की जानकारी स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस को दी है तथा दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
प्राचार्य के पुतला दहन पर छात्रों का विरोध, ABVP की संकीर्ण सोच के खिलाफ निंदा प्रस्ताव
नैनपुर शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य का पुतला दहन करने की ABVP की हरकत को लेकर छात्रों में आक्रोश देखने को मिला। छात्रों ने इसे बेहद निंदनीय कृत्य बताते हुए कहा कि गुरु और प्राचार्य का अपमान करना शिक्षा के मूल्यों और संस्कारों के खिलाफ है। छात्रों ने सामूहिक रूप से बैठक कर ABVP की संकीर्ण मानसिकता के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। उनका कहना था कि निजी स्वार्थ की पूर्ति न होने पर इस प्रकार की असंस्कारी राजनीति करना अनुचित है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की धरोहर है, जिसका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि ऐसे असामाजिक कृत्यों पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ।