कान्हा टाइगर रिजर्व में फिर बाघिन की दर्दनाक मौत, दो चट्टानों के बीच फंसी मिली
मंडला। मध्य प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रिजर्व के मुंडी दादर बीट क्षेत्र में एक व्यस्क बाघिन की दो विशाल चट्टानों के बीच फंसकर मौत हो गई। क्षेत्रीय निदेशक रवींद्र मणि त्रिपाठी ने बुधवार को इस दुखद घटना की पुष्टि की।
वन विभाग के मुताबिक, मंगलवार को लगभग 8 से 10 वर्ष आयु की यह बाघिन मृत अवस्था में पाई गई। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि बाघिन चट्टानों के बीच दुर्घटनावश फंस गई थी और निकलने की कोशिश में असफल रहने के कारण उसकी मौत हो गई।
घटनास्थल पर सघन पड़ताल, साक्ष्य जुटाए गए
बाघिन की मौत की खबर मिलते ही वन अमले ने क्षेत्र को घेरकर मौके पर पहुंच जांच शुरू कर दी। खोजी कुत्तों की मदद से आसपास के इलाके की गहन तलाशी ली गई। अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन के शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी बाहरी चोट, अंग विच्छेदन या शिकार की आशंका को खारिज किया गया है।
फोरेंसिक जांच के लिए नमूने लिए गए
सतर्कता बरतते हुए विभाग ने शव से नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं, ताकि किसी तरह के मानवीय हस्तक्षेप या शिकार की संभावना को पूरी तरह से नकारा जा सके। वन अधिकारियों ने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से संपन्न की गई है।
बाघ संरक्षण पर फिर उठे सवाल
कान्हा टाइगर रिजर्व में इस वर्ष अब तक 6 बाघों की मौत हो चुकी है, जिससे टाइगर कंजर्वेशन की नीति और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- जनवरी: 2 वर्षीय मादा बाघ की मौत
- फरवरी: 13 वर्षीय वृद्ध बाघिन का निधन
- मार्च: 5 वर्षीय नर बाघ की मृत्यु
- अप्रैल: 15 माह की मादा बाघ और 6 माह के शावक की मौत
- जून: वर्तमान घटना — 8-10 वर्षीय बाघिन की मौत
इनमें से पाँच मौतें कान्हा टाइगर रिजर्व के भीतर हुई हैं जबकि एक मौत पार्क की सीमा के पास दर्ज की गई थी।
संरक्षण के उपायों पर मंथन ज़रूरी
लगातार हो रही बाघों की मौतों ने न केवल वन विभाग को, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों को भी चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब बाघ संरक्षण नीतियों की समीक्षा कर, निगरानी तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।