लोन माफी के नाम पर करोड़ों की ठगी ग़रीबो की गिरीबी का बना रहे है मज़ाक

ग्रामीण महिलाएं बनीं माइक्रो फायनेंस फर्जीवाड़े की शिकार, दो ठग फरार – एजेंट बना रहे दबाव

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ग्रामीण महिलाएं बनीं माइक्रो फायनेंस फर्जीवाड़े की शिकार, दो ठग फरार – एजेंट बना रहे दबाव

जिला मंडला लोन के नाम पर चल रहा करोड़ों का ठगी रैकेट

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल मंडला जिले में भोली-भाली ग्रामीण महिलाओं को “लोन माफी” और “बिना ब्याज लोन” का झांसा देकर एक सुनियोजित ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है। दो शातिर ठग विजय डेहरिया और सुखचैन उद्दे, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की आड़ में करीब 1500 से अधिक महिलाओं के नाम पर करोड़ों रुपए के लोन पास करवा कर रकम हड़प कर फरार हो गए।

कैसे रची गई करोड़ों की ठगी की साजिश?

लोन का लालच, माफ़ी का झांसा

ठगों ने महिलाओं को समझाया कि उन्हें बिना ब्याज के ₹1.20 लाख तक का लोन मिलेगा और बाद में यह लोन माफ भी हो जाएगा।

 

रिश्तेदारों से बनवाए समूह

रिश्तेदारों व जान-पहचान वालों के माध्यम से महिला समूह बनवाए गए। हर समूह में 8 से 10 महिलाओं को जोड़कर अलग-अलग कंपनियों से लोन पास कराया गया।

 

लोन खाते में आते ही हड़प ली जाती थी रकम

ग्रामीण महिलाओं के खातों में आते ही 80 से 90% तक की राशि ठगों द्वारा ले ली जाती थी और नाममात्र के कमीशन (₹3000-₹4000) देकर उन्हें चुप करा दिया जाता।

 

कुछ महीनों तक किश्त जमा कर भरोसा जीतना

शुरुआत में किश्त की राशि जमा कराई जाती थी ताकि महिलाओं का विश्वास बना रहे, फिर धीरे-धीरे किश्तें जमा करना बंद कर दिया गया।

 

दो साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा, अब महिलाएं संकट में

यह ठगी करीब डेढ़ से दो साल तक बिछिया, घुघरी, मवई और अन्य गांवों में चलती रही। एक महिलाओ के नाम से 3-4 कंपनियों से भी लोन पास कराए गए। जैसे ही ठगों ने किश्तें जमा करना बंद किया, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों ने महिलाओं पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

एजेंट बना रहे कुर्की का डर, ग्रामीणों में डर का माहौल

अब जब किश्त नहीं जा रही है, तो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट घर-घर जाकर कुर्की और कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं जिससे महिलाएं मानसिक रूप से टूट रही हैं। इनका कहना है कि उन्होंने पैसे विजय डेहरिया और सुखचैन उद्दे को दिए हैं।

ग्रामीणों की गुहार: “हमारी मदद करें!

ग्रामीण महिलाएं अब कलेक्टर और एसपी से न्याय की गुहार लगा रही हैं। उनका कहना है कि हमने कोई अपराध नहीं किया, हमें बहलाकर ठगा गया है। अब सरकार और प्रशासन से न्याय की उम्मीद है।

प्रशासन से मांग: सख्त कार्रवाई और रिकवरी

ग्रामीणों ने मांग की है कि

ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

संबंधित फाइनेंस कंपनियों की जांच करवाई जाए जिन्होंने बिना सख्ती के लोन पास किया। पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता और संरक्षण प्रदान किया जाए।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

बीजाडांडी क्षेत्र में भी हाल ही में ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें एक ठग ने 235 महिलाओं से ₹3.65 लाख की ठगी की थी। इस ठग को गिरफ्तार किया गया। लेकिन बिछिया केस में ठग अब तक फरार है जिससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जरूरत है सख्त कानून और जनजागरूकता की

यह मामला बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोन और फाइनेंस कंपनियों की लापरवाही और लालच का खतरनाक गठजोड़ कैसे गरीबों को बर्बाद कर सकता है। प्रशासन को न केवल अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी, बल्कि फायनेंस प्रणाली की भी गहन जांच

करनी चाहिए।

इनका कहना है

खमरोटी और केवलारी की महिलाओं के द्वारा एक शिकायत आवेदन दिये गये है हम इस शिकायत पर हर पहलु से जांच करेंगे और जाँच में दोषी पाये जाने पर क़ानूनी कार्यवही की जायेगी

धर्मेंद्र धुर्वे निरीक्षक

थाना बिछिया मंडला

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