नैनपुर में सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध चल रही अवैध कटाई

वन विभाग और राजस्व विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
नैनपुर में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई
वन विभाग और राजस्व विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिला यू तो वनाच्छादित क्षेत्र के नाम से जाना जाता है जहाँ पर अनेक प्रकार के पेड़ पौधे और आयुर्वेदिक जड़ी मिलती है और जिले में एक मूल्यवान पेड़ सागौन जो कि अधिक मात्रा में पाया जाता है जिसकी बहुत ही मांग है और इस पेड़ की लकड़ियों से सुंदर सुंदर फर्नीचर दरवाजे बनाये जाते है, सागौन के पेड़ो का वन विभाग के द्वारा प्लांटेशन किया जाता है और इसकी सुरक्षा की दृस्टि बिना अनुमति के पेड़ नही काटे जा सकते है पर कुछ लापरवाही और लालची अधिकारी और लोग बिना अनुमति लिए ही अंधाधुंध कटाई की जा रही है और जिम्मेदार राजस्व विभाग और वन विभाग अपने हाथ पे हाथ रखे आराम फरमा रहे है।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला जिले के विकास खण्ड नैनपुर में पर्यावरण संरक्षण के पर्यावरण को बढावा देने अनेको योजनाओं क्रियान्वयन की जा रही हैं कभी पेड़ एक पेड़ माँ के नाम तो कभी पर्यावरण संरक्षित करने के नाम पर लोगों को जागरूक करने नियंम बनाये गए है और इस जागरूकता के इस दौर में जहाँ एक ओर सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर लाखों पौधों का रोपण कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ भ्रष्ट तंत्र और लापरवाह अधिकारी कर्मचारियों इस कोशिश को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
जहाँ नैनपुर नगर के वार्ड क्रमांक 14 में बेस कीमती सागौन के दो पेड़ दिन दहाड़े काट दिए गए न कोई अनुमति न जिम्मेदार विभाग को कोई जानकारी। पर हैरानी की बात यह है कि यह पूरी घटना की जानकारी देंने के बाद भी कोई कार्यवाही न होना या फिर यह कहा जा सकता है कि वन विभाग और राजस्व विभाग की “मौन सहमति” या यूँ कहें कि मिलीभगत से अबैध कटाई को अंजाम दिया गया हो।
वही प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनपुर के वार्ड क्रमांक 14 में गैस गोदाम के पास स्थित एक निजी प्लॉट में दो बेशकीमती सागौन के पेड़ लगे थे। ये पेड़ वर्षों पुराने थे और न केवल इनकी लकड़ी का आर्थिक मूल्य बहुत अधिक था, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह अत्यंत महत्वपूर्ण थे। 25 सितंबर 2025 को कुछ लोगों को दिन में ही इन पेड़ों को काटते हुए देखा गया। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पेड़ काटने का कार्य जारी था। लेकिन जब 28 सितंबर को पुनः उस स्थान का निरीक्षण किया गया, तो वहाँ पेड़ों का नामोनिशान तक नहीं था।
वही स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्लॉट मालिक ने वन विभाग और राजस्व विभाग से साठगांठ कर और बिना अनुमति लिए ही अबैध को बैध तरीक़े यह कृत्य किया। पेड़ों को काटने के बाद जेसीबी मशीन बुलाकर उनकी जड़ों को भी खोदकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया, ताकि इस गैरकानूनी कार्य का कोई सबूत न बचे। यह एक योजनाबद्ध तरीके से किया गया कार्य प्रतीत होता है, जो ना केवल नियंम कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण के प्रति प्रशासन की असंवेदनशीलता को भी दर्शाता है। जहा एक पेड़ को तैयार होने में सालो लग जाते है और पर्यावरण के दुश्मन अपने निजी स्वार्थों के चलते एक पल भी इन्हें नष्ट करने में नही सोचते हैं और जिन्हें इन्हें रोकने या कार्यवाही की जिम्मेदारी सौपी है वह भी अपने निजी स्वार्थों के चलते अनदेखी कर रहे हैं और सागौन जैसे एक मूल्यवान वृक्ष की बे रोकटोंक काटे जा रहे है,।
वही जानकारों की माने तो सागौन के पेड़ की कटाई के लिए विशेष अनुमति और पर्याप्त कारण की आवश्यकता होती है। यह अनुमति संबंधित वन विभाग और राजस्व द्वारा जारी की जाती है और इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। इसमें पेड़ की आयु, स्थिति, स्थान आदि की जाँच की जाती है। बिना अनुमति के पेड़ काटना भारतीय वन अधिनियम 1927 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दंडनीय अपराध है। बावजूद इसके पेड़ काट दिया गया इस तरह के कृत्य न केवल इन कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत का भी स्पष्ट प्रमाण नजर आ रहा है।
वही वन विभाग और राजस्व विभाग की यह चुप्पी सवालों के घेरे में है। यदि यह कार्य विभागों की जानकारी में हुआ, तो उन्होंने इसकी रोकथाम क्यों नहीं की? यदि यह उनके संज्ञान में नहीं था, तो यह उनकी लापरवाही को दर्शाता है।
वही कुछ जागरुक स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जो इस तरह की अवैध गतिविधियाँ हो रही हैं। नैनपुर क्षेत्र में अवैध कटाई, रेत खनन, अबैध शराब और भू माफियाओं के द्वारा सरकारी और निजी जमीनो में कब्जे जैसे मामलों में विभागीय चुप्पी आम हो गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि “पैसा दो और कुछ भी करो” की नीति यहाँ खुलेआम चल रही है। जहाँ एक ओर सरकार लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण कर रही है, तो दूसरी ओर वर्षों से खड़े कीमती पेड़ इस तरह से बेधड़क काट दिए जा रहे हैं और कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहा। यह नीति और नीयत दोनों पर सवाल उठाता है।
स्थानीय लोगो ने शिकायत करते हुए इस मामले की निष्पक्ष जाँच की मांग कर रहे हैं और संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका की जाँच की जाए और यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। जिससे ऐसे लोगो को एक सबक मिल सकें साथ ही प्लॉट मालिक के खिलाफ भी कार्यवाही की जाए। और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को सिद्ध करे।
वही इस जब इस संबध में रेवांचल की टीम ने अबैध कटाई को लेकर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी से बात करनी चाही और मामंले को अवगत कराते हुए उनका पक्ष रखना चाहा तो उनके मोबाईल पर घण्टी बजती रही पर उन्होंने मोबाईल उठना मुनाशिव नही समझा ऐसे अधिकारी कितने जिम्मेदार और कितने लापरवाह है ये तो उनकी कार्यप्रणाली से ही पता चल रहा है पर अगर कोई नागरिक वन से संबंधित सुचना देना चाहे तो विभाग के जिम्मेदार जब फोन उठाना या फिर लोगो से बात ही नही करना चाहते है तो कैसे वन वन प्राणियों और वन की सुरक्षा हो सकती है ये वड़ा सवाल हैं।
इनका कहना है कि..
में अभी निर्वाचन कार्य से मंडला में हूँ मेरी जानकारी में नही है
रमन इनवाती
पटवारी नैनपुर मंडला