कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की भिड़ंत दो शावकों और एक नर बाघ की मौत

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रेवांचल टाइम्स मंडला विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क, जो मध्यप्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में फैला है, विश्वभर में अपनी जैव विविधता और विशेषकर बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। हर साल की तरह इस वर्ष भी मानसून के बाद पार्क को 1 अक्टूबर को पर्यटकों के लिए खोला गया। लेकिन, 2 अक्टूबर को पार्क से एक बेहद दुखद और चिंताजनक समाचार सामने आया बाघों के आपसी संघर्ष में एक नर बाघ और दो शावकों की मौत हो गई।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना पार्क के मुक्की जोन में हुई, जहां दो नर बाघों के बीच प्रादेशिक वर्चस्व को लेकर संघर्ष हुआ। इसमें एक लगभग 10 वर्षीय बाघ की मौत हो गई। संघर्ष के दौरान हुए भारी उपद्रव में दो शावक भी मारे गए, जिनकी उम्र मात्र एक से दो महीने बताई गई है।
पार्क प्रबंधन ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह संघर्ष बाघों के स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है। बाघ बेहद प्रादेशिक होते हैं और अपने क्षेत्र में किसी अन्य नर बाघ की उपस्थिति को सहन नहीं करते। जब दो नर बाघ आमने-सामने आते हैं, तो अकसर इस तरह की हिंसक झड़पें होती हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची, और मृत बाघों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। विशेषज्ञों की टीम इस बात की जांच कर रही है कि संघर्ष की पूरी स्थिति क्या थी, और इसके पीछे कौन-कौन से बाघ शामिल थे।
इस घटना से न केवल पार्क प्रशासन, बल्कि पर्यटक और वन्यजीव प्रेमी भी स्तब्ध हैं। पर्यटकों की भारी संख्या 1 अक्टूबर से पार्क में देखी गई थी, और ऐसे में बाघों की मौत की खबर ने सभी को व्यथित कर दिया। खासकर नन्हे शावकों की मौत ने लोगों को भावुक कर दिया। जंगल में हर जीव को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ता है, और ऐसे टकराव असामान्य नहीं हैं।
वर्तमान में कान्हा नेशनल पार्क में बाघो की बढ़ती संख्या निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ ही इलाके की सीमितता के कारण बाघों में आपसी संघर्ष की संभावना भी बढ़ जाती है।
वन विभाग इस घटना के बाद से निगरानी बढ़ा रहा है और अन्य बाघों के व्यवहार पर नजर रखी जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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