आयरन की गोलियां भूल जाएंगे! खून की कमी दूर करने के लिए रामबाण हैं आयुर्वेद के ये 3 नुस्खे
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान के कारण महिलाओं और बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) एक आम समस्या बन गई है। कई बार महंगी दवाएं भी वो असर नहीं दिखा पातीं जो आयुर्वेद के सरल नियम कर दिखाते हैं।
सिरदर्द, कमजोरी और बार-बार चक्कर आना ये शरीर में पल रहे एनीमिया के शुरुआती संकेत हैं। जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण कम हो जाता है तो ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को पांडु रोग कहा गया है जिसे दवाओं के बजाय जीवनशैली में बदलाव से ठीक किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक पंचामृत का जादू
खून की कमी दूर करने के लिए आयुर्वेद पंचामृत के समान पांच घरेलू चीजों के सेवन की सलाह देता है।
- रात में 2 मुनक्का और 2 अंजीर भिगोकर सुबह इनका सेवन करें।
- सुबह खाली पेट सफेद पेठे और आंवले का ताजा रस पिएं।
- तिल और गुड़ का सेवन बढ़ाएं और रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण लें।
- विशेष रूप से शहद के साथ लौह भस्म का चाटना हीमोग्लोबिन को तेजी से बूस्ट करता है।
सही आहार और परहेज
शरीर में आयरन सोखने की क्षमता बढ़ाने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, सहजन (Drumstick) और चुकंदर को थाली का हिस्सा बनाएं। फलों में अनार, खजूर, सेब और काले अंगूर का सेवन रामबाण है। दोपहर के भोजन में छाछ जरूर लें क्योंकि यह पाचन सुधार कर रक्त निर्माण में सहायता करती है।
ज्यादा हरी मिर्च, बैंगन, बहुत खट्टे फल और डिब्बाबंद (Packed) भोजन से पूरी तरह परहेज करें क्योंकि ये शरीर में पित्त बढ़ाकर रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
लोहे के बर्तन और सूर्य स्नान
आयुर्वेद के अनुसार खाना पकाने के लिए लोहे की कड़ाही का उपयोग करना चाहिए। इससे भोजन में प्राकृतिक रूप से आयरन के कण मिल जाते हैं। इसके साथ ही सूर्य स्नान यानी सुबह की हल्की धूप लेना अनिवार्य है। यह विटामिन-D के स्तर को सुधारता है जो लाल रक्त कोशिकाओं की मजबूती और निर्माण के लिए बेहद जरूरी है।
यदि आप इन तीन नियमों को सिर्फ 7 दिन तक ईमानदारी से अपनाते हैं तो शरीर में स्फूर्ति और रक्त के स्तर में स्पष्ट सुधार महसूस करेंगे।