नशा मुक्त अभियान के तहत रैली निकालकर विरोध किया गाँव मे शराब के कारोबार को रोकेगी महिला शक्ति
महिलाएं एक मत होकर ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित किया गया

रेवांचल टाइम्स मवई मंडला विकासखंड मवई, की ग्राम पंचायत बीजा में महिलाओं द्वारा “पैसा एक्ट” के तहत चलाया गया नशा मुक्ति अभियान एक साहसिक और प्रेरणादायक कदम है। इस अभियान में महिलाओं ने एकजुट होकर रैली निकाली और ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर शराब तथा अन्य मादक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।पेसा एक्ट के तहत ग्राम पंचायत में सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्राम पंचायत बीजा में मादक पदार्थ नियंत्रण अधिनियम 1985 धारा 15 धारा 16 धारा 24 पेसा एक्ट 1996 धारा 4 (क)धारा (ख) के तहत ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में सामुदायिक संस्थानो का अधिकार है ग्राम सभा की बैठक में सर्व सम्मति से शराब विक्रय पर प्रतिबंध का निर्णय लिया गया जो शराब प्रतिबंध का उल्लंघन करेगा उस पर जुर्माना लगाया जाएगा शराब बेचने पर ₹30,000, शराब पीकर उत्पात करने पर ₹25,000 और गांजा पीने वालों पर ₹51,000 का जुर्माना। साथ ही, सूचना देने वालों को ₹5,000 का इनाम देने की भी घोषणा की गई।यह अभियान महिला सशक्तिकरण का एक ठोस उदाहरण है। ग्रामीण महिलाएं, जो वर्षों से नशे के दुष्परिणाम झेलती आई हैं चाहे वह घरेलू हिंसा हो, आर्थिक तंगी या सामाजिक अपमान अब महिलाएं खुद आगे आकर समाज सुधार की दिशा में कदम उठा रही हैं। इस अभियान से यह संदेश गया कि महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, वे सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध भी संघर्ष कर सकती हैं।
यह पहल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भी प्रभावी उपयोग है। महिलाओं ने ग्राम सभा जैसे मंच का उपयोग कर जनसमर्थन जुटाया और एक सामूहिक निर्णय को कानूनी रूप दिया। यह दर्शाता है कि जब जनता संगठित होती है, तो स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव संभव हैं।अब सवाल उठता है कि क्या इस विरोध से शराब का विक्रय रुक सकता है? इसका उत्तर है संभव है, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों। सबसे पहले, पूरे गांव का समर्थन जरूरी है, खासकर पुरुषों का। दूसरा, प्रशासन का सहयोग और निगरानी आवश्यक है, जिससे अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई हो सके। तीसरा, इस अभियान को निरंतरता मिले, केवल एक दिन की रैली से बदलाव नहीं आएगा। महिलाओं को लगातार सजग रहना होगा।साथ ही, अवैध शराब बेचने वालों को वैकल्पिक रोजगार देने की व्यवस्था भी जरूरी है, जिससे वे इस धंधे को छोड़ सकें। गांव में नशा विरोधी समिति बनाकर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। महिलाओं का यह आंदोलन एक सकारात्मक और जागरूक समाज की ओर बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह प्रयास संगठित रूप से जारी रहा और प्रशासनिक सहयोग मिला, तो निश्चित रूप से गांव को नशा मुक्त बनाया जा सकता है और अन्य पंचायतों के लिए भी यह एक आदर्श बन सकता है।नशा मुक्ति अभियान में उपस्थित मोबेलाईजर श्रीमती ज्योति साहू सचिव कलावती साहू अध्यक्ष उर्मिला पनेरिया सदस्य सुहाग कविता मरकाम ओमती कराते दुलारी फूलमती मरकाम प्रेमवती उईके लक्ष्मी साहू सविता साहू मिनिया परते धनेश्वर साहू भंगा लाल साहू डीलन साहू एवं अन्य सदस्य की भूमिका सराहनीय रही।