माढ़ोताल में हत्या की हड़कंप: राजीव गांधी नगर में युवक पर बेरहमी से हमला, पुलिस पर सवाल

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जातिवाद और द्वेष की आग में जलकर एक निर्दोष युवक की जान गई; गली में खुलेआम हुई हिंसा, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल

माढ़ोताल। त्योहारों और जश्न की रौनक के बीच एक खौफनाक वारदात ने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। ईश्वर वंशकर, जो दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन जुलूस में शामिल होकर हनुमानताल तालाब जा रहे थे, उन्हें उनके ही पड़ोसियों ने तलवार, लोहे के पाइप और हाथ घूसों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया।
घटना उस समय हुई जब गली नंबर 5 में मौजूद फुलवर भट्ट, अरुण भट्ट, अरुण जैन, राज भट्ट और शिवम चक्रवर्ती ने ईश्वर को देखकर गाली-गलौज करना शुरू किया। कुछ ही देर में उन्होंने हमला कर दिया। घायल ईश्वर को उनके बेटे और मोहल्लेवाले अस्पताल ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
देव वंशकर, मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया कि उनके पिता की किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हत्या जातिगत द्वेष और जलन के चलते की गई, क्योंकि वारदात में शामिल सभी लोग उनकी छोटी जाति से अत्यधिक द्वेष रखते थे।
लेकिन इस पूरे मामले ने एक और बड़ा सवाल खड़ा किया है….पुलिस कहाँ थी? गली में खुलेआम हथियार लेकर घूम रहे बदमाशों और गाली-गलौज के बावजूद सुरक्षा तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय रहा। क्या पुलिस सिर्फ घटना के बाद सक्रिय होती है, या नागरिकों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है?
पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
यह हत्या केवल एक आदमी की मौत नहीं है। यह सामाजिक विष और प्रशासनिक विफलता का आईना है। जब इंसानियत की जगह जाति, जलन और लालच हावी हो, तब ऐसे हादसे दोबारा होने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
रिपोर्ट अनुज बन्देवार

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