राशि गायब, सड़क अधूरी: घुरघुटी-घोरेघाट में वन समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल

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रेवांचल टाईम्स – मण्डला, ज़िले में आज कोई भी विभाग भ्रष्टाचार से अछूता नहीं हैं और लगातार भ्रष्टाचार इन दिनों चरम सीमा पार कर रहा है! वन विभाग में कहावत सत्य होती नज़र होती आ रही है कि जंगल में मोर नाचा पर देखा कौन इसी तरह से जंगल विभाग में विकास के काम हो रहे है पर उन कार्यों में केवल अधिकारियों और कर्मचारीयो का विकास तेज़ी से चल रहा हैं कागज़ो की ख़ानापूर्ति कर कार्य पूरा कर दिया जाता हैं!
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है, कहीं अवैध वृक्ष कटाई का मामला सामने रहता है तो कहीं मजदूरों के भुगतान में लापरवाही उजागर होती है तो कहीं निर्माण कार्यों पर सवाल उठते हैं। वन विभाग का एक ताजा मामला प्रकाश में आया है पूर्व सामान्यं वनमण्डंल के मोतीनाला परिक्षेत्र के अधीनस्थं घुघरी ब्लॉक का वनग्राम घुरघुटी एवं घोरेघाट यहॉ वन समिति गठित है लेकिन वर्षों से समिति सदस्यों को अध्यक्ष एवं विभाग द्वारा आय-व्यय का हिसाब नहीं बताया गया है जिसकी शिकायत सदस्यों व वनग्राम के पीडित लोगों द्वारा कलेक्टर से करते हुए बताया गया कि ग्राम घुरघुटी में जंगल की ओर जाने के लिए एक किमी दूरी की ग्रेवल रोड का निर्माण होना था किन्तु, यह रोड केवल 150 मीटर त‍क ही बनायी गई है। इसी तरह स्कूलटोला से खेरमाई होते हुए पटपरटोला तालाब तक 700 मी. की रोड का प्रस्ताव किया गया था लेकिन इस रोड का कार्य आज तक शुरू ही नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त् दोनों रोड के लिए 31 लाख रूपये स्वीकृत हुए थे लेकिन राशि कहॉ गई पता ही नहीं है। वन विभाग के बीटगार्ड तारेन्द्र राय पर आरोप लगाये गए है कि वन समिति घुरघुटी अध्यक्ष भगत सिंह धुर्वे एवं वन समिति घोरेघाट अध्य‍क्ष बुधसिंह सैयाम की मिलीभगत से परिक्षेत्र अधिकारी अभय पाण्डे के संरक्षण में मनमानी की जा रही है। शिकायत पत्र पर उल्लेख किया गया है कि वन समिति सदस्यों से दो माह पूर्व सौ-सौ रूपये वसूला गया है और कहा गया था कि शासन की योजना अनुसार प्रत्येक सदस्य के खाते में पॉच हजार रूपये डाले जायेंगे लेकिन यह राशि आज तक नहीं मिली। इसी तरह वनग्राम में शासन द्वारा मिलने वाले अन्य लाभ जैसे समतलीकरण, खेत तालाब, सीसी रोड आदि का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। और अब दिनांक 11 जून को बीट गार्ड द्वारा गांव में पहुंचकर शिकायत वापस लेने का दवाब बनाया गया किन्तु पीडितों द्वारा मॉग की गई है कि उक्त मामले की शीघ्र निष्पक्ष जॉच करते हुए दोषियों के विरूध्द दण्डात्मक कार्यवाही की जाये।

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