सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहगांव में लापरवाही का बोलबाला ….वर्षों से बंद पड़ा एक्स-रे रूम, जिम्मेदार अधिकारी मौन

रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार प्रयास तो कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। मोहगांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इसकी एक ज्वलंत मिसाल बन गया है, जहां लापरवाही, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता ने इस केंद्र को बदहाल बना दिया है। वर्षों से बंद पड़ा एक्स-रे रूम इस केंद्र की बदहाली की सबसे बड़ी तस्वीर पेश कर रहे हैं
एक्स-रे रूम वर्षों से बंद, मरीजों को भुगतनी पड़ रही भारी परेशानी
मोहगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक्स-रे रूम कई सालों से बंद पड़ा हुआ है, जबकि इसकी मशीनें और उपकरण धूल खा रहे हैं। हड्डी टूटने या चोट लगने के मामलों में मरीजों को मजबूरी में मंडला, या जबलपुर जैसे दूरस्थ अस्पतालों में जाना पड़ता है। यह न केवल आर्थिक रूप से बोझ बढ़ाता है, बल्कि गंभीर मरीजों की जान पर भी खतरा बन जाता है।
सूत्रों से जानकारी अनुसार एक्स-रे मशीन कई साल पहले यहां स्थापित की गई थी, लेकिन तकनीकी खराबी आने के बाद उसे सुधारने की कभी गंभीर कोशिश नहीं की गई। वहीं स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी भी स्वीकार करते हैं कि विभाग को कई बार सूचना दी जा चुकी है, परंतु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई
एक ग्रामीण ने बताया,
अगर किसी को हड्डी टूट जाती है या कोई दुर्घटना हो जाती है तो हमें मंडला या जबलपुर भागना पड़ता है। एक्स-रे मशीन तो है, लेकिन चालू नहीं है। इतने सालों से हम यही सुनते आ रहे हैं कि जल्द चालू होगी, लेकिन कुछ होता नहीं।
नेत्र चिकित्सक चार महीनों से नदारद
स्वास्थ्य केंद्र में एक और बड़ी समस्या है नेत्र चिकित्सक की अनुपस्थिति। करीब चार महीनों से नेत्र विभाग पूरी तरह ठप पड़ा है। आंखों से संबंधित रोगियों को इलाज के लिए निजी क्लीनिक या जिले के बड़े अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।मोहगांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों लोगों को आंखों की समस्या अधिक रहती है, लेकिन नेत्र चिकित्सक न होने से उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कई बार स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी केवल सामान्य दवा देकर मरीजों को टाल देते हैं, जबकि वास्तविक इलाज के लिए विशेषज्ञ की जरूरत होती है।
जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों गंभीर समस्याओं की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को पहले से है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी केवल कागज़ी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं। केंद्र की वास्तविक स्थिति देखने या सुधार करने कोई नहीं आता। इससे यह स्पष्ट है कि निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक प्रणालीगत लापरवाही ने जन स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित कर रखा है।
मरीजों की बढ़ती परेशानियाँ
मोहगांव स्वास्थ्य केंद्र के मरीजों को अब यह स्थिति “सामान्य” लगने लगी है। जो लोग नियमित इलाज के लिए आते हैं, वे या तो निजी अस्पतालों का सहारा लेते हैं या इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। गरीब वर्ग के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है क्योंकि निजी अस्पतालों का खर्च वहन कर पाना उनके लिए संभव नहीं।
स्वास्थ्य केंद्र की अन्य समस्याएँ भी उजागर
केवल एक्स-रे रूम और नेत्र विभाग ही नहीं, बल्कि केंद्र के अन्य विभागों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। रात के समय डॉक्टरों की अनुपस्थिति, , साफ-सफाई में लापरवाही और उपकरणों की खराब स्थिति ने मरीजों का विश्वास पूरी तरह तोड़ दिया है।
कुछ लोगों का कहना है कि रात में आपातकालीन सेवाएँ केवल नाममात्र की रह गई हैं। यदि कोई गंभीर मरीज रात को आता है तो उसे तुरंत मंडला रेफर कर दिया जाता है।
ग्रामीणों की नाराजगी और मांग
ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिखता।
ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को ज्ञापन देने की तैयारी की है, जिसमें वे एक्स-रे रूम को तत्काल चालू करने और नेत्र चिकित्सक की तैनाती की मांग करेंगे।
सुधार की उम्मीद या फिर केवल आश्वासन?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से अक्सर यही कहा जाता है कि “जल्द व्यवस्था सुधार ली जाएगी”, लेकिन पिछले कई वर्षों से यही वादा दोहराया जा रहा है। केंद्र की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है। अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो यह लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करे स्वास्थ्य विभाग से जवाब तलब किया जाए और बंद पड़ी सुविधाओं को चालू कराकर चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।जब तक प्रशासन जागेगा, तब तक ना जाने कितने मरीजों को और तकलीफें झेलनी पड़ेंगी।”