जल स्त्रोत धराशायी / सूखे कंठ, जीविका में संकट कागजों में धड़ हो रहे पूर्ण कार्य
रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के निवास क्षेत्रो में गर्मी के प्रकोप और मौसम के असंतुलन के बीच निवास नगर सहित कई ग्राम जल संकट से जूझ रहे हैं। बढ़ती तपन और अनियमित वर्षा के कारण नगर के अनेक वार्डों एवं सुदूर अंचल में पीने के पानी की समस्या गंभीर हो गई है। और एक तरफ विभाग वाहवाही लूट रहा है।
गांवों में जीवन-यापन के लिए पानी ढोने का कार्य करने वाले श्रमिकों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। स्थानीय होटलों ओर घरों में पीने का पानी कावर से भरने बाले पाडर पानी निवासी बाबू लाल प्रतिदिन डब्बा भर पानी ₹10 में होटल एवं जरूरतमंदों तक पहुँचाते हैं। परंतु अब बिगड़े हैंडपंप और बढ़ती दूरी ने उनका कार्य कठिन बना दिया है। बाबू लाल बताते हैं, “हैंडपंप खराब होने से अब 2 किमी दूर से पानी लाना पड़ता है। चिलचिलाती धूप में यह कार्य करना मुश्किल हो गया है, लेकिन पेट की खातिर करना मजबूरी है।”
प्राकृतिक का असंतुलन मानव समाज के लिए खतरे का संकेत है। पर्यावरण के संरक्षण हेतु कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं की पहल सराहनीय है, किंतु प्रशासनिक सहयोग और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
वही जिले के अधिकांश गाँवो आज लोग जल संकट से जूझते नजऱ आ रहें है और इन क्षेत्रों के लिए तत्काल राहत उपायों की मांग उठने लगी है।