जिला जेल मंडला की लापरवाही के चलते विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत,

परिजनों ने लगाया जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप

परिजनों ने की न्यायिक जांच की मांग

परिजनों ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन, जेल प्रशासन पर लगाया गंभीर आरोप

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/ जिला जेल मंडला भगवान भरोसे ही हैं यहां के सजायाफ्ता कैदी और विचाराधीन कैदी शायद सब भगवान भरोसे ही जिला जेल में रहने को मजबूर हैं। ऐसा नहीं हैं कि जिला जेल मंडला के ऊपर पहली बार कोई आरोप लगे हो इसके पहले भी जिला जेल पर अनेक बार सुर्खियों में बने रहने की वजह से वाहवाही लूट चुका हैं। आज फिर से ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां जिला जेल मंडला के ऊपर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। लगभग पैंतीस वर्षीय मृतक अजीत पटेल के परिजनों ने आरोप लगाते हुए बतलाया कि अजीत पटेल पिता जगदीश पटेल निवासी ग्राम बिनैका पिछले करीब 14 से 15 महीनों से धारा 376 पास्को एक्ट में विचाराधीन कैदी जिला जेल में बंद था। वही आरोप लगाते हुए मृतक के परिजनों ने बतलाया कि उससे मिलने को उसके परिजन समय समय पर जिला जेल में आते जाते रहते थे। पिछले हफ्ते जब मृतक के परिजन अजीत पटेल से मिलने को जिला जेल में आए थे तो अजीत पटेल स्वास्थ्य था।
ग्राम बिनैका निवासी 65 वर्षीय जगदीश पटैल ने जिला कलेक्टर मंडला को दिए अपने आवेदन में बताया कि उनका एकमात्र पुत्र अजीत पटैल विगत 14-15 माह से धारा 376 भा.द.वि. एवं पाक्सो अधिनियम के तहत मंडला जेल में बंद था।
परिजनों के अनुसार, कुछ दिन पूर्व मृतक की बहन अंजली पटैल और जीजा संदेश पटैल उससे जेल में मुलाकात करने गए थे। उस दौरान अजीत पूरी तरह स्वस्थ था। और जेल प्रशासन ने उसके अस्वस्थ होने की कोई जानकारी नहीं दी थी।

जगदीश पटैल ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 की शाम करीब 4 बजे संदेश पटैल को फोन पर सूचना मिली कि अजीत पटैल की तबीयत गंभीर है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो यह देखकर स्तब्ध रह गए कि अजीत पटैल की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।
परिजनों का आरोप है कि जेल अधीक्षक व कर्मचारियों द्वारा इस मामले को छुपाया गया। और सूचना देर से दी गई। परिवार का कहना है कि मौत की परिस्थितियाँ संदिग्ध हैं। और ऐसा प्रतीत होता है कि जेल के अंदर ही किसी गंभीर परिस्थिति या साजिश के तहत उसकी हत्या की गई है।
तो वही परिजनों ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांचकी मांग करते हुए कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और परिवार को न्याय दिलाया जाए।
तो वही इस मामले को लेकर जिला जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि रूटीन चेकअप के दौरान विगत दिनांक 18 अक्टूबर को डॉक्टर ने अजीत पटेल का चेकअप कर उसके स्वास्थ्य होने की जानकारी जिला जेल प्रशासन को दी थी। और जांच के दौरान हीमोग्लोबिन में 12 प्वाइंट से अधिक होना बतलाया गया था। आज सुबह जब परेड के दौरान अजीत पटेल ने कमजोरी होना बतलाया तो डॉक्टर ने तुरंत ही ओआरएस का घोल पिला कर जिला चिकित्सालय में इलाज करवाने की बात कही जिसके बाद तुरंत ही 11 बजे के करीब अजीत पटेल को जिला अस्पताल के लिए रवाना कर दिया गया। उसके बाद तबीयत जायदा खराब होने के चलते 2 बजकर 30 मिनट में जिला चिकित्सालय से मेडिकल के लिए इलाजरत अजीत पटेल को रवानगी करने की बात कही गई। और कुछ ही देर के बाद में अजीत पटेल की सांसे थम गई। जिसकी सूचना करीब 4 बजे मृतक के परिजनों को फोन कॉल के माध्यम से दी गई।
अब मामला चाहे जो भी हो जिला जेल प्रशासन और वहां पर नियमित रूटीन चेकअप करने वाले स्वास्थ्य विभाग पर एक गंभीर प्रश्न तो बनता हैं। कि जब पिछले हफ्ते ही मृतक अजीत पटेल का हीमोग्लोबिन 12 प्वाइंट से अधिक होना बतलाया गया था तो फिर अचानक से आज जांच के दौरान हीमोग्लोबिन का कम होना कैसे बतलाया गया। तो वही जेल अधीक्षक का कहना हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने उनको बतलाया कि हो सकता हैं पहले की जो जांच रिपोर्ट आई थी उसमें कोई टेक्निकल फॉल्ट रही होगी। तो क्या फिर आज एक घर का चिराग क्या सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और जिला जेल प्रशाशन की लापरवाही के चलते बुझ गया। यदि ऐसा है तो फिर यह एक गंभीर मामला हैं क्योंकि किसी की लापरवाही के चलते अगर कोई जान चली जाती है तो फिर इसका जिम्मेदार आखिर कौन हैं यह एक चर्चा का विषय हैं।

इनका कहना है…

विचाराधीन कैदी अजीत पटेल के परिवारजनों का जो आरोप है वो निराधार हैं आज सुबह जब 11 बजे करीब अजीत पटेल को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय ले जाया गया था। उसके सीसीटीवी फुटेज हमारे पास में हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान ही अजीत पटेल की मौत हुई हैं।

संजय सहलाम
जेल अधीक्षक मंडला

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