श्री गिरीश बिल्लौरे: बच्चों के प्रेरणास्रोत
रेवाँचल टाईम्स – गिरीश बिल्लौरे “मुकुल” अनंत यात्रा पर रवाना हो गए हैं। वे विशेषकर संभागीय बालभवन, जबलपुर के बच्चों के प्रेरक, मार्गदर्शक, अभिभावक, मित्र – सब-कुछ एक साथ थे। उनके सानिध्य में कितने ही बच्चों ने प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कलात्मक एवं साहित्यिक पहचान बनाई है। हालांकि, उन्होंने प्रत्येक आयुवर्ग तथा हरेक अभिरुचि के लोगों के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से काफ़ी सृजन- कार्य किया है।
बालभवन उनके लिए दूसरा घर बन गया था। बच्चों के साथ उनका अधिकतर समय बीतता था। बच्चों के सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विकास के लिए वे कोई कोर- कसर नहीं छोड़ते थे। प्रत्येक बच्चे से उसका सर्वश्रेष्ठ निकलवाना उनका परम ध्येय होता था। वे अनुशासन के लिए बच्चों को डांटने से भी नहीं चूकते थे। किंतु, अगले ही पल उसे पुचकारकर हंसा भी देते थे।
वे ग़ज़ब के कलापारखी थे। उनमें इस बात की ज़बरदस्त समझ थी कि किस बच्चे को किस क्षेत्र में आगे बढ़ाने पर वह सर्वाधिक प्रगति करेगा। मैंने 10 वर्ष की अवस्था में केवल गर्मी की छुट्टियों में नृत्य और गायन सीखने के उद्देश्य से बालभवन में प्रवेश लिया था। किंतु, उन्होंने कुछ दिनों में ही भांप लिया कि मुझे अभिनय तथा मंच संचालन के क्षेत्र में अधिक सफलता मिलेगी। उन्होंने मुझे न केवल इन क्षेत्रों में समुचित प्रशिक्षण दिलाया, बल्कि प्रदर्शन के लिए बहुत-से अवसर भी उपलब्ध कराए। इसका यह सुपरिणाम हुआ कि 2 वर्ष के भीतर मुझे राष्ट्रपति जी द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय बालश्री पुरस्कार से नवाजा गया। जब यह सूचना बालभवन पहुंची, तो उनके चेहरे पर बालसुलभ उत्साह, हँसी और खिलखिलाहट थी।
उनके मार्गदर्शन में बहुत- से बच्चों ने साहित्य, कला एवं संस्कृति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की। प्रख्यात गायिका इशिता विश्वकर्मा इसका ज्वलंत उदाहरण हैं, जो ज़ी टीवी सारेगामापा की राष्ट्रीय विजेता, इंडियाज गॉट टैलेंट की उपविजेता तथा प्लेबैक सिंगर हैं।
आप बच्चों के सर्वांगीण विकास पर बल देते थे। बच्चों में सांस्कृतिक राष्ट्रवादी चेतना का भी संचार करते थे। आर्थिक रूप से ज़रूरतमंद बच्चों की शासकीय, संस्थागत तथा व्यक्तिगत स्तर पर भी सहायता करते थे। नौनिहालों के माता- पिता से भी वे निरंतर सम्पर्क में रहते थे। उनका स्पष्ट मानना था कि बच्चों का समुचित विकास समन्वित प्रयासों और टीम वर्क से ही संभव है। उन्होंने बालभवन से सभी विधाओं के श्रेष्ठ शिक्षकों को जोड़ा। इससे बच्चों को लगातार बेहतर प्रशिक्षण सुलभ होता रहा है।
वैसे तो वे सभी बच्चों का ध्यान रखते थे, किंतु बच्चियों की प्रगति उनकी प्राथमिकता होती थी। उन्होंने महसूस किया कि आज भी अनेक परिवारों में लड़कों को लड़कियों से अधिक प्राथमिकता दी जाती है। अनेक लड़कियों को प्रतिभा होने के बावजूद उन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते हैं। अनेक बार जब माता- पिता अपनी बच्चियों को शहर के बाहर जाकर प्रस्तुति देने से मना कर देते थे, तो उनकी उनसे प्यार भरी झड़प भी हो जाती थी। जब कभी माता- पिता ज़्यादा नाराज़ हो जाते, तो वे बड़े दिल से सम्मानपूर्वक उन्हें फोन करके मना भी लेते थे। सर ने बालदिवस पर मुझे एक दिन के लिए बालभवन का निर्देशक बनाया था। अपनी मुख्य कुर्सी पर मुझे बैठाया था और बग़ल की कुर्सी में बैठकर काम – काज की बारीकियों से अवगत कराया। साथ ही कुछ छोटे- मोटे निर्णय लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
गीत, कविता, गद्य, व्यंग्य, संस्मरण,बालगीत, लघुकथा — उन्होंने तकरीबन प्रत्येक विधा पर लिखा। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया — हर स्तर पर वे सक्रिय थे। पत्रकार भी होने के कारण समसामयिक विषयों पर उनकी पैनी नज़र रहती थी। उनकी रचनाएं राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक गौरव तथा मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत होती थीं। उनके व्यंग्य हंसाने के साथ- साथ गहरा संदेश भी देते थे।भारतीय मानव सभ्यता एवं संस्कृति के प्रवेशद्वार : 16,000 ईसा पूर्व,शुभकामनाएं — एक चिंतन, फ़ुर्सत के रास्ते, उफ़- ये चुगलखोरियां आदि उनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं।
आप अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थाओं से सतत् सक्रियता से संलग्न रहे। आप प्रखर वक्ता एवं कुशल मंच संचालक थे।अपने माता- पिता की स्मृति में साहित्य, कला एवं समाजसेवा के क्षेत्र में अनेक पुरस्कार प्रायोजित करते रहे। सर प्रसिद्ध यूट्यूबर भी रहे।बालभवन की शासकीय सेवा से निवृति के पश्चात् जीवन के अंतिम क्षणों तक आप पत्रकारिता से संबद्ध रहे। उनके स्वर्गवास से कुछ घंटे पूर्व उन्होंने मुझे मुम्बई में फोन लगाकर कला के अलावा लेखन से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया और कुछ टिप्स दिए।
श्री गिरीश बिल्लौरे ” अब सशरीर बीच नहीं हैं, किंतु उनका व्यक्तित्व व कृतित्व हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा तथा संबल प्रदान करेगा। उन्हें विनम्र अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।
— श्रेया खंडेलवाल, राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता तथा ब्रांड एंबेसडर, स्वच्छता अभियान और वोकल फॉर लोकल, जबलपुर