सरकारी तंत्र के संरक्षण में महिलाओं का शोषण!
गुंडों के इशारों पर चल रहा प्रशासन — आखिर कब रुकेगा यह अत्याचार?

गरीब महिला की रोज़ी-रोटी तोड़ी गई, सत्ता-तंत्र बना मूकदर्शक
रेवाँचल टाईम्स – मंडला, मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में शासन-प्रशासन की नाकामी और भ्रष्ट गठजोड़ का शर्मनाक उदाहरण सामने आया है। भू-माफिया, दबंगों और गुंडों के इशारों पर अब राजस्व विभाग तक झुक चुका है — जहां गरीब और असहाय महिलाओं की रोज़ी-रोटी को भी निर्ममता से कुचल दिया जा रहा है।
नैनपुर तहसील के ग्राम पाठसिहोरा में ग्राम परसवाड़ा की महिला अनीता यादव विगत कई वर्षों से ग्रामवासियों की सहमति से शासकीय भूमि पर एक छोटे ठेले में जनरल स्टोर चला रही थीं। इसी दुकान से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं।
लेकिन भू-माफिया कपिल कछवाहा ने इस जमीन पर अपना दावा ठोक दिया और लगातार महिला को दुकान हटाने की धमकी देने लगा। जब महिला ने ग्रामवासियों की सहमति से छोटी पक्की दुकान का निर्माण शुरू किया, तभी दबंग कपिल अपने गुंडों के साथ आया और अर्धनिर्मित दुकान को तोड़ डाला!
अनीता यादव ने तत्काल 100 नंबर पर शिकायत की, परंतु पिंडरई पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की — उल्टा आरोपियों को संरक्षण दे दिया।
कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें पहुंचीं, मगर हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
1 साल तक किया गया उत्पीड़न — अंत में जेसीबी से तोड़ी दुकान!
राजस्व विभाग नैनपुर ने मामले को लगभग एक वर्ष तक लटकाए रखा। महिला को बार-बार पेशी के नाम पर बुलाकर परेशान किया गया।
अनीता यादव ने सर्वे दस्तावेज़, ग्रामवासियों की सहमति और ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट तक प्रस्तुत की, जिसमें स्पष्ट था कि वह भूमि शासकीय है — लेकिन फिर भी विभाग ने भू-माफिया के दबाव में निर्णय दिया।
17 अप्रैल को अचानक कोटवार के जरिए मौखिक सूचना दी गई कि “12 बजे से पहले दुकान हटा लो, वरना प्रशासन खुद हटा देगा।”
लिखित नोटिस तक नहीं दिया गया — और दोपहर में राजस्व निरीक्षक, पिंडरई पुलिस और कपिल के 10–15 गुंडे मौके पर पहुंच गए।
किसी को सुनवाई का अवसर दिए बिना जेसीबी से दुकान तोड़ दी गई।
महिला की पुकार – “मुझे इंसाफ चाहिए!”
अनीता यादव ने कहा कि उसने शासन से न्याय की उम्मीद में दर-दर दस्तक दी, पर कहीं सुनवाई नहीं हुई।
आज वही भू-माफिया शासकीय भूमि पर कब्जा कर दुकान बना रहा है, और राजस्व अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
ग्रामवासियों का कहना है कि कपिल स्वयं भी सरकारी भूमि पर निर्माण कर रहा है, परंतु राजस्व निरीक्षक पैसे और प्रभाव में आकर गलत माप कर रहा है और दोषी को संरक्षण दे रहा है। दें जनता का सवाल – “क्या प्रशासन गुंडों का साथी बन गया है?”
इस पूरे प्रकरण ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों में गुस्सा है कि महिलाओं की रोज़ी-रोटी उजाड़ने वाले गुंडों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
राजस्व निरीक्षक और पुलिस कर्मियों पर निलंबन की मांग उठ रही है।
जन अपेक्षा
मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से अपील है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें, महिला को पुनः स्थान और न्याय दिलाएं।
वही मंडला जिले में दिन व दिन गिर रही कानून व्यवस्था और बेलग़ाम जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा अपनी जिम्मेदारी को नज़र अंदाज के कारण से अपराध में बढ़ रहें है और समय रहते जिम्मेदार नहीं जागे तो इस तरह के अत्याचारों पर रोक लगाना अब आवश्यक हो गया है।