जबलपुर में धधकता खतरा RTI मैं हुआ खुलासा, दर्जनों अस्पताल अग्निशमन मानकों पर फेल, प्रशासन और CMHO बना मूक दर्शक

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बिना पार्किंग, बिना फायर सेफ्टी फिर भी अस्पतालों को मिल रही संचालन की ‘छूट’

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर

जबलपुर में कई निजी अस्पताल और नर्सिंग होम्स मौत के कुएँ में तब्दील हो चुके हैं। नगर निगम की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शहर के दर्जनों अस्पताल न तो फायर ब्रिगेड के प्रवेश योग्य हैं, न ही उनके पास आग से निपटने के लिए बुनियादी संसाधन मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि इन सबके बावजूद CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) और जिला प्रशासन आंखें मूंदे बैठे हैं।

सवालों के घेरे में प्रशासन और CMHO

सूत्रों के अनुसार नगर निगम की अग्निशमन शाखा ने उन अस्पतालों की सूची बनाकर स्वास्थ्य विभाग को भेज दी है, जो भवन अनुज्ञा और अग्निशमन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे। लेकिन महीनों बीतने के बावजूद को ठोस कार्रवाई नहीं हुई

> “क्या CMHO किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?”
> – सवाल उठा रही है आम जनता, जनप्रतिनिधि और एडवोकेट्स।

बिना पार्किंग, बंद गलियाँ और एंट्री प्वाइंट कैसे पहुंचेगा फायर ब्रिगेड?

नगर निगम अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के दर्जनों अस्पताल ऐसे भवनों में चल रहे हैं:

* जहां तीनों तरफ से अग्निशमन वाहन की एंट्री असंभव है
* कोई वैध पार्किंग या आपात निकास (Emergency Exit) मौजूद नहीं
* फायर अलार्म और वाटर हाइड्रेंट जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी नदारद

बड़े-बड़े प्राइवेट अस्पतालों को ‘नियमों की छूट’ क्यों?

यह बड़ा सवाल अब आम जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों तक पूछ रही है कि,
* आम व्यक्ति के छोटे क्लीनिकों पर सख्ती, लेकिन
* बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटल्स को “मूक छूट” क्यों?
* क्या CMHO और प्रशासनिक अधिकारी किसी दबाव में हैं?

लेकिन सवाल है — कब होगी यह कार्रवाई?और क्यों नहीं हो रही?

कब जागेगा प्रशासन?

पिछले कुछ वर्षों में देशभर में अस्पतालों में लगी आग की घटनाएं दर्जनों मासूम जानें लील चुकी हैं। लेकिन जबलपुर प्रशासन मानो किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है।

1. गैर-मानक अस्पतालों के संचालन पर तुरंत रोक लगे
2. CMHO और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय हो
3. अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निगरानी समिति गठित हो
4. फायर सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

जबलपुर के अस्पतालों में सुरक्षा नहीं, लापरवाही का इलाज मिल रहा है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो आने वाली दुर्घटनाओं के लिए सिर्फ अस्पताल नहीं, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी बराबर के दोषी माने जाएंगे।

> क्या CMHO कार्रवाई से डर रहे हैं या फिर “सुविधा शुल्क” के साये में सबकुछ दबा दिया गया है?

> जब जनता का जीवन दांव पर हो, तो नियमों की अनदेखी का मतलब सिर्फ एक है हत्या की तैयारी।

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