भोपाल में मछुआरों का वार्षिक अधिवेशन मात्र औपचारिकता मछुआरों की समस्याओं का निराकरण नहीं

रेवाँचल टाईम्स – भोपाल, राज्य मत्स्य महासंघ द्वारा विभिन्न जिलों में जलाशयों के कार्यरत प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों सदस्यों का वार्षिक आम सभा भोपाल में करने जा रही है। इस सम्मेलन को लेकर मध्यप्रदेश श्रमिक मछुआरा संघ के मुन्ना बर्मन, रमेश नंदा, जितेन्द्र मांझी, श्यामा बाई मछुआरा और राज कुमार सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि 90 के दशक में तत्कालीन सरकार ने राज्य मत्स्य विकास निगम को समाप्त कर “राज्य मत्स्य महासंघ” के माध्यम से कार्य का संचालन शुरू किया था। जिसका उद्देश्य था कि जलाशय और मछुआरा विकास के लिए स्थानीय सक्रिय मछुआरा प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए समस्त गतिविधियां उनके अनुसार संचालित की जाए। परन्तु मध्यप्रदेश राज्य मत्स्य महासंघ का विगत दो दशकों से अधिक वर्षों से चुनाव नहीं हुआ है और केवल राज्य शासन से नियुक्त प्रशासक के माध्यम से कार्य संपन्न कराया जा रहा है। यह वार्षिक आम सभा केवल औपचारिकता मात्र रह गया है, जबकि इसमें जलाशय में कार्यरत मछुआरों की समस्याओं को सुनना और उसका निदान करने पर चर्चा होना चाहिए। जलाशयों में सही मात्रा और पारदर्शी बीज संचय नहीं होने के कारण मत्स्य उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है। जिससे मछुआरा रोजगार की तलाश में पलायन करने को बाध्य है।विगत कई वर्षों से मत्स्य महासंघ द्वारा मछली पकड़ने की मजदूरी दर नहीं बढाया गया है। राज्य मत्स्य महासंघ द्वारा 2000 हेक्टेयर से बङे जलाशयों में मेजर और माइनर कार्प मछली पकङने की मजदूरी क्रमशः 34 और 20 रूपये प्रति किलो तय किया हुआ है। मछली पकड़ने का मजदूरी शासन द्वारा घोषित मूल्य बाजार भाव से बहुत ही कम है जिससे ठेकदारों की कमाई तो बढती है, परन्तु मछुआरा आर्थिक तंगहाली में है।गैर मछुआरा समुदाय के प्रभावशाली लोग प्राथमिक मछुआरा सहकारी समिति के माध्यम से अधिकतर जलाशयों पर कब्जा किये हुए हैं और उन्हें जिले के विभागीय अधिकारियों का संरक्षण भी प्राप्त है। मध्यप्रदेश के मछुआरों को विगत दो वित्तीय वर्षों से बचत सह राहत योजना की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। जबकि यह मत्स्याखेट के बंद ऋतु में प्रतिवर्ष मछुआरों को मिल जाया करता था। बरगी जलाशय में अभी तक मत्स्याखेट कार्य शुरू नहीं हुआ है। जबकि यह 15 अगस्त के बाद चालू हो जाना चाहिए था। मछुआरे बेरोजगार बैठे हैं। मछुआरों द्वारा जलाशय में मत्स्याखेट एवं विपणन और जल संपदा की सुरक्षा का अधिकार देने की मांग करते आ रहे हैं। परन्तु सरकार इन मांगों को अनसुनी करती आ रही है। ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश राज्य मत्स्य महासंघ द्वारा 7 बङे और 19 मझौले मिलाकर कुल 26 जलाशयों का नियंत्रण किया जाता है। जिसका कुल क्षेत्रफल 2.29 लाख हेक्टेयर है।
उपरोक्त सभी समस्याओं को लेकर मध्यप्रदेश श्रमिक मछुआरा संघ ने मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री, प्रमुख सचिव मत्स्य विभाग और प्रबंध निदेशक राज्य मत्स्य महासंघ भोपाल को ज्ञापन भेजा गया है। मध्यप्रदेश श्रमिक मछुआरा संघ ने सरकार को चेतावनी दिया है कि अगर मछुआरों की जायज मांगों पर कार्यवाही नहीं हुआ तो पर प्रदेश के मछुआरा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
मुन्ना बर्मन (8435931972), अध्यक्ष बरगी जलाशय मत्स्य संघ। रमेश नंदा (9424730909)।
पूर्व संचालक राज्य मत्स्य महासंघ

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