फर्जी जाति प्रमाण–पत्र के मामलों पर सरकार सख्त, आरटीआई कार्यकर्ता की पहल के बाद विभागों को कड़े निर्देश जल्द हो सकती है बड़ी कार्यवाही….
दैनिक रेवांचल टाइम्स – भोपाल/डिंडौरी मध्यप्रदेश में जाति प्रमाण–पत्रों में हो रही गड़बड़ियों को लेकर अब सरकार सक्रिय हो गई है। आरटीआई कार्यकर्ता दिगम्बर खांडिलकर (वार्ड नं. 02, डिंडौरी) द्वारा सूचना के अधिकार के तहत लगाए गए आवेदन के बाद सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल ने प्रदेश के सभी प्रमुख विभागों, कलेक्टरों और अधिकारियों को कड़े दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।
वही खांडिलकर ने अपने आवेदन में सवाल उठाया था कि शासन द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद बहुत से स्थानों पर जाति प्रमाण पत्र जारी करते समय उचित सत्यापन नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते फर्जी और गलत प्रमाण–पत्र बन रहे हैं। यह शिकायत राज्य सूचना आयोग तक पहुँची, जिसने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग से जवाब तलब किया।
सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश — 21 जुलाई 2017
राज्य सूचना आयुक्त की संस्तुति पर विभाग ने आदेश जारी करते हुए कहा कि:
एससी/एसटी/ओबीसी/विशेष पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण–पत्र अब सख्त जांच के बाद ही जारी हों।
आवेदकों द्वारा प्रस्तुत जाति, निवास, मूल निवासी, जन्म, आय–जाति–निवास आदि प्रमाण–पत्रों की कड़ाई से जांच अनिवार्य है।
गलत या फर्जी प्रमाण–पत्र जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई निश्चित है।
विभागों को सचेत किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही शासन स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
आरटीआई कार्यकर्ता दिगम्बर खांडिलकर को आयोग का उत्तर
राज्य सूचना आयोग द्वारा भेजे गए जवाब में यह भी कहा गया है कि––
यदि आवेदक (खांडिलकर) प्राप्त सूचना से असंतुष्ट हों तो 30 दिनों के भीतर प्रथम अपील दायर कर सकते हैं। विभाग ने उनके आवेदन पर की गई कार्रवाई की प्रति भी उपलब्ध कराई है।
17 प्रमुख विभागों को भेजा गया आदेश
यह निर्देश राजस्व मंडल, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, पंचायत विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पुलिस विभाग, लोकायुक्त, निर्वाचन आयोग सहित 17 उच्चस्तरीय विभागों को भेजे गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर गलत जाति प्रमाण–पत्र जारी न हो सके।
संवेदनशील मुद्दे पर खांडिलकर की महत्वपूर्ण पहल
आरटीआई कार्यकर्ता दिगम्बर खांडिलकर ने कहा कि––
“फर्जी जाति प्रमाण–पत्र हजारों गरीब व पिछड़े वर्ग के वास्तविक पात्र लोगों का हक मार देते हैं। यह आदेश ऐसे फर्जीवाड़े पर बड़ा रोक लगाएगा।”
उनके आवेदन के बाद शासन द्वारा कार्रवाई शुरू होना एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।