आदिवासी जिले में तेजी से हुआ विकास ये डिजिटल इण्डिया की नई तस्वीर
पन्नी से बनाई झोपड़ी में बुजबुजिया प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई करने की जद्दोजहद
रेवांचल टाइम्स – मंडला, बैगा आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में नगर मुख्यायल से लेकर ग्रामीण अंचलो तक जो विकास हुआ वह देखते ही बनता जनता कोई भी मूलभूत सुविधाएं की अवस्कता नहीं जहाँ देखो वहाँ मंत्री विधायक सांसद ने विकास किया लोगों को बिन मांगे ही स्वच्छ पीने का पानी बिना गड्डो की सड़के बच्चों के अच्छी पढाई के लिए बड़े बड़े स्कूल भवन छात्रावास जिनमे गुणवत्ता युक्त भोजन इस जिले के जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जितनी तारीफ करगे वह कम होंगी !
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वन ग्राम घोड़ाडीह बुजबुजिया के भोले-भाले आदिवासी परिवारों के सैकड़ों बच्चों का भविष्य पांच वर्षों से बर्बादी की ओर, कागजी कार्यवाही के बाद भी किसी भी जिम्मेदार को नहीं है परवाह । आम आदमी पार्टी ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान जाना हाल।कलेक्टर सहित जिम्मेदारों को लिखा पत्र_
वही विकासखंड मण्डला के अंतर्गत वन ग्राम घोड़ाडीह बुजबुजिया के प्राइमरी में आदिवासी बच्चे आज भी स्वच्छ हवा और साफ सुथरे वातारवरण में पन्नी से बनाई गई झोपड़ी में बैठकर उज्जवल भविष्य बनाने जद्दोजहद में पांच वर्षों से लगे हुए हैं।
आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों के हालचाल जानने के दौरान यह मामला पाया है। लगभग बीस साल पहले बना प्राइमरी शाला भवन जर्जर होकर गिर रहा है। सिल्पुरा ग्राम पंचायत के पोषक ग्राम के इस शाला भवन की जर्जर हालत देखकर विभाग के अधिकारियों ने भी यहां पर कक्षाएं लगाने रोक लगाने फरमान दे तो दिए पर यह नहीं बताया, कि कक्षाएं लगाना कहां है।और तो और पोलिंग बूथ को भी यहां से अन्यत्र कर दिया गया है। तभी से बच्चों को अनेकों जगह बदल-बदलकर बैठाकर पढ़ाने की कोशिश यहां पर पदस्थ शिक्षकों के द्वारा की जाती रही है। मजबूरी इतनी है,कि कुछ महीने किसी ग्रामीण के बरामदे में तो, कुछ महीने बिना छत वाले खुले रंगमंच पर,तो कुछ महीने पेड़ के नीचे कक्षा लगाने के नाम पर पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढाने की जद्दोजहद की जाती रही है । हल्की सी बारिश आते ही शाला परिसर में ही स्थित आंगनबाड़ी भवन के छोटे से एक मात्र कमरे में ही आंगनबाड़ी के लगभग पंद्रह बच्चे और प्राइमरी के इन सभी बच्चों को भींगने से बचाने की कोशिश की जाती है। हल्की सर्द हो या हल्की गर्मी बच्चे बिना सुरक्षित कमरों के बहुत परेशान हो जाते हैं। पढ़ाई हो नहीं पाती है।इस वर्ष तो गांव के कुछ जागरूक ग्रामीण और पालकों सहित शाला में पदस्थ शिक्षकों ने आपस में चंदा -बिरार करके कुछ लकड़ियां,पन्नी और हरे नेट खरीद कर झोपड़ी तैयार कराई है । तभी से बच्चों को असुरक्षित माहौल में भी बैठाकर पढ़ाने को मजबूर हैं। इस झोपड़ी मे न ही बैठने के लिए समतल जगह है ,और न ही कहानी आदि की किताबें व्यवस्थित रखने सुरक्षित पुस्तकालय का इंतजाम । भवन ही नहीं तो बिजली की तो बात ही नहीं। यहां पर पांच वर्षों से सिर्फ और सिर्फ जुगाड़ ही जुगाड़ से कामचलाऊ कक्षाएं लगाकर कामचलाऊ शिक्षा दी जा रही है। बच्चों से बातचीत करने पर बताया है,कि अच्छी सुविधाएं नहीं होने के कारण उनका मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगता है। ग्रामीणों और पालकों ने बताया, कि अन्य गांव के स्कूलों की दूरी लगभग चार किलोमीटर से ज्यादा है। इसलिए बच्चों को कहीं भेजकर पढ़ाने के लिए हम मजबूर रहते हैं।हमारे परिवार की माली हालत भी इतनी अच्छी नहीं है, कि कहीं और ले जाकर ठीक-ठाक स्कूलों में बच्चों को पढ़ा सकें। इस शाला भवन की जर्जर स्थिति के बारे में विभाग और कलेक्टर के पास पांच वर्षों से आवेदन निवेदन, यजनसुनवाई आदि लगातार करते आ रहे हैं ।एक दो बार अधिकारी दौरे पर आये जरूर पर अब तक इस समस्या का समाधान किसी ने भी नहीं कराया है।अब हम थके और ठगे अनुभव करते जा रहे हैं।
पदस्थ शिक्षक का कहना है,कि मुझे तो नौकरी करनी है, मैं अपना शिक्षकीय कर्तव्य का निर्वहन करता आ रहा हूं।स्कूल रोज समय पर पहुंचकर शाम को साढ़े चार बजे तक सुरक्षित माहौल की चिंता किए बगैर ही बच्चों को जितना अच्छा संभव हो सकता है पढ़ाने का काम करता आ रहा हूं। विभाग को अनेकों बार लिखित में जानकारी दी जा चुकी हैं। नए भवन निर्माण की कोई जानकारी नहीं है। सचमुच बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाने के लिए पर्याप्त सुविधाओं का यहां पर अभाव है।ऐसी परिस्थितियों में भी बच्चों के उज्जवल भविष्य की चिंता करना समाज के समग्र विकास के लिए सख्त जरूरी है।
पीने का पानी भी यहां पर फ्लोराइड वाला है।
स्कूल के पास ही खुदे हैंडपंप ही कुछ दिनों के लिए एक मात्र सहारा है। जिसमें भी फ्लोराइड वाला पानी आता है। शुद्ध पानी नहीं मिलने के कारण फ्लोराइड युक्त पानी के उपयोग से बच्चों के दांत खराब होते जा रहे हैं। बच्चों का स्वास्थ्य भी हमेशा बिगड़ता रहता है ।उनका दिमाग भी कमजोर सा बना रहता है। जिसकी चिंता भी पालकों ने जताई है। फ्लोराइड युक्त पानी से ग्रामीणों के भी हाल बेहाल हैं। स्कूल परिसर में नल जल योजना के अंतर्गत स्ट्रक्चर मात्र बनाया दिया गया था । वह भी टूट गया है। पानी सप्लाई कनेक्शन दिया ही नहीं गया है।
किचिन शेड भी खराब हो चुका है। आंगनबाड़ी के किचिन शेड में मध्यान्ह भोजन पकाना पड़ रहा है। शौचालय भी टूट-फूटकर अनुपयोगी हो गया है। बच्चे – बच्चियां खुले में शौच और पेशाब करने को मजबूर रहते हैं।
यहां पर किसी भी प्रकार के खेल खेलने के लिए खेल मैदान भी नहीं है।
स्कूल पक्की सड़क के किनारे पर बाउंड्री वॉल भी नहीं है,जिसके कारण बच्चे हमेशा असुरक्षित रहते है।
आम आदमी पार्टी मण्डला ने इस गंभीर समस्या की ओर ध्यानाकर्षण कराने कलेक्टर मण्डला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मण्डला और जिला शिक्षा केन्द्र समन्वयक को पत्र लिखकर अबोध आदिवासी बच्चों को शिक्षा अधिकार अधिनियम के अनुसार उनके हित में शीघ्र ही उचित व्यवस्था बनाए जाने का आग्रह किया है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान पार्टी की ओर से चंद्रगुप्त नामदेव,डी .डी. कुमरे,डी.एस.वरकड़े, एस .के .परते,सहजान सिंह परस्ते और पी.डी. खैरवार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।