सड़क के लिए तरस रहे हैं, पटनीपानी के चार सौ आदिवासी परिवार आजादी के बाद भी नही कुछ बदला बदले है तो नेता मंत्री

193

रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले के विकास खण्ड घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत बम्हनी (देवहारा) मैं आज भी विकास दूर दूर तक नजर नही आ रहा है और आज भी आज़ादी के पहले ही जैसे ही हालात नजर आ रहें है जहाँ पर न विधायक न मंत्री और न जिला प्रशासन और न ही ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव लोगों को मिलने वाली मुलभूत सुविधाएं पर ध्यान नही दिया बस वादे और भाषण देकर लोगो को खुश करने की कवायद जारी है। वही सैकड़ो आदिवासी परिवार सदियों से रहते आ रहे हैं लेकिन आज तक उनके बीच सड़क नहीं पहुंच पाई यही नहीं यहां के आदिवासी परिवार पानी के लिए प्राकृतिक स्रोतों पर ज्यादा आश्रित रहते हैं l विद्युत नहीं लगने के कारण पूरा गांव के घरों में अंधेरा छाया हुआ है l
लेकिन इन आदिवासी (बैगा )परिवारों की पीड़ा दूर नहीं किया गया है जिसके कारण उनके मन में अब निराशा बैठ चुकी है ग्रामीणों ने बताया कि यहां जब किसी भी की तबीयत खराब होती है तो भारी मुसीबत खड़ी हो जाती है क्योंकि एंबुलेंस अथवा चार पहिया वाहन व मोटरसाइकिल गांव में पहुंच नहीं पाते हैं सबसे बड़ी परेशानी प्रसूता महिलाओं को होती है प्रसव पीड़ा उठने के बाद उन्हें खाट पर लेटा कर 7 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है तब जाकर सड़क मिल पाती है इसमें काफी समय बर्बाद हो जाती है कई बार महिला जान तक गवा बैठी है बारिश के महीने में खाट पर ले जाने के लिए भी पर्याप्त रास्ता नहीं मिल पाता है स्कूल तक रास्ता नहीं होने के कारण ग्राम के बच्चे भी शिक्षा से वंचित हो चुके हैं हम लोगों ने ग्राम के स्थानीय जनप्रतिनिधि जनपद सदस्य एवं सरपंच के साथ सड़क बनवाने के लिए क्षेत्रीय विधायक व सांसद और जिला कलेक्टर से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन गांव तक पहुंचाने के लिए सड़क का निर्माण नहीं करवाया गया है
Iअभी नहीं तो कभी नहीं, स्थानीय विधायक नहीं समझ रहे हैं आदिवासियों की परेशानी l
वही ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की स्वीकृति अब नहीं मिली तो कभी नहीं मिल पाएगी क्योंकि विधानसभा विधायक नारायण सिंह पट्टा तीसरी पंचवर्षीय के विधायक है और उन्हें जनता के दुख दर्द से कोई लेना देना नही है और लोकसभा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते आठवां पंचवर्षीय दोनों नेता आदिवासी परिवार से आते हैं इससे बढ़िया सहयोग दोबारा नहीं बनेगा और इनसे अच्छे नेता कभी आदिवासियों को मिल भी नही सकते है क्योंकि ये केवल बोट मांग कर राजपाठ हाशिल कर अपना अपने करीबियों रिश्तेदारों और बच्चों के लिए चुनाव जीतते है है बाकी जनता और उनके दुख दर्द से कोई लेना देना नही है इन्हें ग़रीब आदिवासियों से वोट कैसे मांगना है और कैसे जितना है इन्हें अच्छे से आता है आज भी जिले के दूर दराज ग्रामीण अंचलों में लोग मूलभूत सुविधाएं से वंचित है और जिले के गरीब आदिवासी जनता आज भी आजादी के पहले जैसे ही माहौल में जी रही हैं
ग्रामीणों ने कहा कि अब तो हमारा गांव तक की सड़क बन जानी चाहिए l
और चुनाव में किए जाते बड़े-बड़े वादे I
लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का उसे समय बड़े-बड़े नेता इसी पतली गली से घर-घर पहुंच कर वोट मांगते हैं जब उनसे सड़क निर्माण की बात कहा जाता है तो वह बड़े-बड़े वादे करते हैं कहते हैं कि चुनाव जीते ही पहले यही काम करा देंगे इसलिए आप लोग मुझे वोट करें लेकिन चुनाव जीतते ही ग़ायब हो जाते है सत्ता शुख में गरीबों से किये वादे भूल कर अपनी राजपाठ सँभाल कर जनता की याद तक नही करते हैं और 5 वर्ष तक कोई भी नेता इस क्षेत्र में नजर नहीं आता है। और न ही जनता की सुध लेना तक मुनाशिब नही समझते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.