जिले में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, ग्राम पंचायत करेगांव में कागज़ों पर विकास…जमीनी हकीकत शून्य

रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार, मनमानी और फर्जी बिलों के माध्यम से सार्वजनिक धन की खुली लूट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास कार्यों को लेकर बनाई गई व्यवस्थाएं अब केवल कागज़ों तक सीमित रह गई हैं। पंचायतों में विकास का दावा तो लाखों रुपये खर्च कर कागज़ों पर दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की न तो कोई प्रगति दिखाई देती है और न ही कोई ठोस काम नजर आता है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सबसे अधिक गंभीर स्थिति ग्राम पंचायत करेगांव की बताई जा रही है, जहां सरपंच–सचिव और उपयंत्री की कथित मिलीभगत से भारी वित्तीय अनियमितताओं का खेल लंबे समय से चल रहा है। पंचायत में फर्जी फर्मों के नाम पर बिना हस्ताक्षर, बिना सील, बिना तिथि और बिना जीएसटी नंबर के मनमाने ढंग से बिलों का भुगतान किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पंचायत द्वारा जिन दुकानों और फर्मों को भुगतान दिखाया गया है, उनमें से कई का अस्तित्व वास्तविक रूप में कहीं भी नहीं है। ना तो ये दुकानें स्थानीय बाजार में दिखाई देती हैं और न ही जिले में इनका कोई पता-ठिकाना है।
पंचायत में विकास कार्यों को महज कागज़ी खानापूर्ति बना दिया गया है। परिवहन, मरम्मत और सार्वजनिक सुविधाओं के नाम पर भारी-भरकम बिल पेश कर धनराशि निकाल ली जाती है
फर्जी बिलों का खेल संदिग्ध भुगतानों की लंबी सूची
पंचायत दर्पण में सामने आए कुछ प्रमुख बिलों को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंचायत में किस पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है।(1) विजय डिजिटल स्टूडियो बिल नंबर 30दिनांक 21/08/25बिल पर न सरपंच सचिव की सील, न हस्ताक्षरGST नंबर भी नहीं कुल भुगतान: ₹8,796एक डिजिटल स्टूडियो को आखिर पंचायत द्वारा किस कार्य के लिए इतनी राशि दी गई (2)अमित होटल एंड माँ नर्मदा टूर एंड ट्रेवल्स बिल बिना दिनांक करेगांव मंडला से निवास तक दो चक्कर का दावा वाहन नंबर का कोई उल्लेख नहीं भुगतान ₹12,000
परिवहन के नाम पर ये राशि किस आधार पर दी गई, इसका कोई विवरण नहीं (3) माँ इलेक्ट्रिकल्स मोहगांव बिल नंबर: 28दिनांक 11/10/25बिना सील, बिना हस्ताक्षर, बिना GSTभुगतान ₹13,500 -(4) चौरसिया टूर एंड ट्रेवल्स बिल नंबर 109बिना तिथि
रूट करेगांव से मंडला करेगांव से बीजापुरी, करेगांव से निवास
वाहन नंबर नहीं भुगतान ₹10,500 (5) जय मटेरियल सप्लायर बिल नंबर 6 दिनांक 15/10/25 बारहमासी सड़क मरम्मत कार्य के नाम पर भुगतान: ₹9,000बिल में न GST, न मात्रा, न प्रमाणिकता (6) शर्मा कॉन्ट्रैक्शन (मध्यप्रदेश, शिवपुरी)बिल नंबर: 07बिना सील, बिना हस्ताक्षर, बिना GSTसीसी रोड निर्माण के लिए भुगतान फर्म का पता जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर—मौजूदगी संदिग्ध 6000.भुगतान (7)जय मटेरियल सप्लायर बिल नंबर 8 दिनांक: 19/10/25बिना सील व हस्ताक्षर भुगतान ₹7,000 (8) हनीफ इंटरप्राइजेस, चाबी दिनांक: 19/11/25किराना, इलेक्ट्रॉनिक एवं जनरल सामग्री सार्वजनिक कार्यों के नाम पर भुगतान: ₹4,500 (9) हनीफ ट्रेडर्स बिल नंबर: 1865 बिना दिनांक व बिना हस्ताक्षर पानी टैंकर, सेंटिंग, रेत परिवहन आदि के नाम पर भुगतान लगभग बिना योग ₹40,000(10) एम.के. ट्रेडर्स, बगली मोहगांव बिल नंबर 80बिना तिथि ईंट, रेत, गिट्टी, सीमेंट, बोल्डर और मजदूरी भुगतान ₹15,386
सवालों के घेरे में पंचायत तंत्र—कहीं भी पारदर्शिता नहीं
इन सभी बिलों में एक समानता है—किसी में भी अधिकृत हस्ताक्षर या सील नहीं है, GST नंबर नहीं है, कई में तिथि का अभाव है, और अधिकांश में वस्तुओं/सेवाओं की मात्रा का कोई उल्लेख नहीं है। यह सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का संकेत है।लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बिलों पर जिन फर्मों के नाम हैं, वे फर्म आसपास के कस्बों में कहीं भी नहीं मिलतीं। इस कारण संदेह गहराता जा रहा है कि ये फर्में केवल कागज़ी रूप से बनाई गई हैं ताकि इनके नाम पर भुगतान लेकर राशि हड़पी जा सके।
पंचायत में जवाबदेही शून्य, अधिकारी भी खामोश
सरपंच, सचिव और उपयंत्री की कथित मिलीभगत का मामला सामने आने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की चुप्पी सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि ज़िम्मेदार अधिकारी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे।अधिकांश बिल इस तरह से बनाए गए हैं मानो पंचायत के नाम पर सरकारी खजाने से धन निकालना महज औपचारिकता रह गया हो। स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट हो
ग्राम पंचायत करेगांव कि एक स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से पंचायत की वित्तीय ऑडिट कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा संभव है।लोगों ने यह भी कहा कि जब तक पंचायत की व्यावसायिक और वित्तीय प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक विकास कार्य कभी सही रूप में नहीं हो पाएंगे।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की जांच केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगी, या वास्तव में सख्त कार्रवाई होगी ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार की ये घटनाएँ न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी हैं, बल्कि ग्रामीण विकास की रीढ़ को कमजोर करती हैं।यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि जांच शुरू हो और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े।करेगांव पंचायत में सामने आए फर्जी बिलों का मामला जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण विकास के नाम पर हुई ये कथित अनियमितताएं गंभीर चिंता का विषय हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो गांवों में विकास का सपना सिर्फ कागज़ों में ही सिमटकर रह जाएगा और भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी होती जाएंगी।और ग्रामीण जनता इसी तरह ठगी जाती रहेगी यह ग्राम पंचायत करेगॉव का यह मामला केवल एक पंचायत का नही बल्कि पूरे जिले में फैले भ्रष्टाचार की एक झलक है।