प्रस्फुटन समितियों को पैसे रोककर बैठी सरकार!
बिना बजट काम करने को मजबूर समितियां — गुस्सा चरम पर, जवाबदेही शून्य
रेवाँचल टाईम्स – मंडला।जन अभियान परिषद के तहत कार्यरत ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों की उपेक्षा अब खुलकर सामने आने लगी है। सरकार वर्षों से इन समितियों को एक रुपए तक का आवंटन नहीं दे रही, जबकि इन्हीं समितियों से गांव-गांव विकास कार्यों की उम्मीद रखी जाती है।
समितियों के सदस्यों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि “बिना बजट के काम करो और शिकायत मत करो”— यही सरकार का रवैया बन चुका है।
सूत्रों का दावा है कि राशि आवंटन में खुला भेदभाव हो रहा है
कुछ समितियों को पैसा दिया जा रहा है
कुछ से काम तो लिया जा रहा है, पर पैसा नहीं
कई समितियों को तो काम से भी पूरी तरह बाहर कर दिया गया है
क्या है सच, क्या है सेटिंग — यह तो जांच में ही साफ होगा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा यह है कि प्रस्फुटन समितियों को जिम्मेदारी देने की जगह उपेक्षा, भेदभाव और वित्तीय रोक का खेल चल रहा है।
ग्रामवासियों की मांग साफ है —
हर प्रस्फुटन समिति को समान अवसर और पर्याप्त कार्य दिया जाए।
जन अभियान परिषद से जुड़े सभी कार्यों में समितियों को प्राथमिकता दी जाए।
सालों से रोकी गई पूरी राशि तुरंत जारी की जाए — एक भी बकाया पैसा बचे नहीं।
लोगों का सवाल सरकार से अब सीधा है—
“जब समितियां गांव का विकास कर रही हैं, तो सरकार उनका अधिकार क्यों दबा रही है? पैसे देने में भेदभाव क्यों?”
यदि हालात ऐसे ही रहे, तो जनता का आक्रोश जल्द ही सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।