गौ सेवक मैत्री कल्याण संगठन ने उपसंचालक पशुपालन व डेयरी विभाग को सौंपा ज्ञापन
मैत्री कार्यकर्ताओं के मानदेय एवं सुविधा बढ़ाने की मांग

रेवांचल टाइम्स मंडला प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य के बीच गौ सेवक मैत्री कल्याण संगठन ने उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य तभी संभव है जब पंचायत स्तर तक कार्यरत मैत्री कार्यकर्ताओं को उचित मानदेय, संसाधन और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। ज्ञापन में मैत्रियों द्वारा किए जा रहे कार्यों, उनके दायित्वों तथा मौजूदा व्यवस्थाओं की कमियों को विस्तार से बताते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं।
संगठन ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध विकास एवं पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण में मैत्री कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर वे विभागीय योजनाओं और अभियानों के क्रियान्वयन में सहयोग देते हैं। इनमें दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, बधियाकरण, पशुओं में टैगिंग, प्राथमिक उपचार, भ्रूण वृद्धि, वत्स उत्पादन प्रोत्साहन तथा अन्य पशुपालन योजनाएं शामिल हैं। मैत्री कार्यकर्ताओं के अनुसार, वे दिन-रात क्षेत्र में सक्रिय रहकर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे दुग्ध उत्पादन और पशुधन स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।
लेकिन, ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विभाग द्वारा उन्हें प्रदान की जाने वाली प्रोत्साहन राशि उनके श्रम और समय के अनुपात में बेहद कम है। उदाहरण के तौर पर, दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के अंतर्गत प्रति परिवार मात्र पांच रुपये का भुगतान प्रस्तावित किया गया है, जिसे मैत्री कार्यकर्ताओं ने अत्यंत कम बताया। उन्होंने निवेदन किया कि प्रति परिवार 25 से 30 रुपये भुगतान निर्धारित किया जाना चाहिए तथा एक कार्यकर्ता प्रति दिन अधिकतम 10 परिवार ही कवर कर सकता है, ऐसे में व्यावहारिक भुगतान निर्धारण आवश्यक है।संगठन ने कहा कि वर्तमान में कृत्रिम गर्भाधान पर 50 रुपये, वत्स उत्पादन पर 100 रुपये तथा टीकाकरण पर 5 रुपये का भुगतान किया जाता है, जो किसी भी तरह जीविकोपार्जन योग्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि मैत्रियों को मानदेय स्वरूप प्रति माह सम्मानजनक राशि निर्धारित की जाए ताकि वे आर्थिक अस्थिरता से मुक्त होकर कार्य पर अधिक ध्यान दे सकें। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि मैत्रियों को मानदेय का भुगतान गौशालाओं की तर्ज पर प्रतिमाह किया जाए, ताकि उन्हें नियमित और समय पर आय प्राप्त हो सके।
ज्ञापन में मैत्री कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि फील्ड कार्य के दौरान उन्हें दुर्घटना का जोखिम बना रहता है। इस स्थिति को देखते हुए संगठन ने प्रत्येक मैत्री को दुर्घटना बीमा प्रदान करने की मांग रखी है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में उनके परिवार को सुरक्षा मिल सके।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2014–15 से पहले राष्ट्रीय गौवंशी एवं भैसवंशी योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को भी मैत्री योजना में शामिल किए जाने का अनुरोध किया गया है। संगठन के अनुसार, इन प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के अनुभव और दक्षता का लाभ विभाग और पशुपालकों दोनों को मिलेगा।मैत्री कार्यकर्ताओं ने यह भी शिकायत की कि कंटेनर, बधियाकरण मशीन तथा अन्य आवश्यक सामग्री टूट-फूट होने पर उन्हें समय पर प्रतिस्थापन उपलब्ध नहीं कराया जाता, जिससे उनका कार्य प्रभावित होता है। इसलिए विभाग से मांग की गई कि आवश्यक उपकरणों की तात्कालिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि पशुपालन सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
संगठन ने यह भी कहा कि मैत्रियों के कार्यों का उचित विभाजन किया जाए तथा शासन स्तर पर मैपिंग करते हुए ही मानदेय का निर्धारण किया जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि कार्य के आधार पर भुगतान व्यवस्था भी सुचारु होगी। साथ ही, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों के तहत मैत्रियों को अधिक जिम्मेदारी और संसाधन उपलब्ध कराने से राज्य सरकार के लक्ष्य की प्राप्ति में तेजी आएगी।
ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया कि मैत्री कार्यकर्ता पशुपालन विभाग का जमीनी स्तर पर मजबूत आधार हैं। यदि उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक, सुरक्षा, उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो वे प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने में निर्णायक योगदान दे सकते हैं। संगठन ने विश्वास जताया कि विभाग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे पशुपालकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें भी शासन से पर्याप्त सहयोग की आवश्यकता है। ज्ञापन सौंपने के दौरान कई मैत्री कार्यकर्ता उपस्थित रहे और उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान होगा।