आस्था से बड़ा शराब ठेका! आबकारी अधिकारी के बयान ने भड़काया जनाक्रोश

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*ये कैसी आस्था और कैसा व्यापार*
*आस्था से बड़ा शराब ठेका?*
*मंदिर के सामने शराब दुकान पर कार्रवाई से इनकार आबकारी अधिकारी प्रनय श्रीवास्तव के बयान से भड़का जनाक्रोश*

रेवांचल टाईम्स – सिवनी, जिले के प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य द्वार के पास संचालित शराब दुकान को लेकर उठे तीखे विरोध के बीच आबकारी अधिकारी प्रणय श्रीवास्तव का बयान अब प्रशासन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। अधिकारी द्वारा यह कहना कि “केवल ट्रस्ट में दर्ज मंदिर ही मान्य हैं, बाकी मंदिरों के सामने शराब दुकान पर कार्रवाई नहीं होगी, सीधे तौर पर धार्मिक आस्था, सामाजिक मर्यादा और शासन के दिशा-निर्देशों की अवहेलना माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आबकारी अधिकारी का यह बयान शराब ठेकेदारों को खुला संरक्षण देने जैसा है। सवाल यह है कि क्या आस्था अब सरकारी रजिस्टर देखकर तय होगी? क्या वर्षों पुराने मंदिरों का अस्तित्व केवल इसलिए अमान्य हो जाएगा क्योंकि वे ट्रस्ट में दर्ज नहीं हैं?
मामला यहीं नहीं रुकता। जानकारी के अनुसार मंदिर के पास स्थित यह शराब दुकान मुख्य मार्ग, सार्वजनिक आवागमन क्षेत्र और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच संचालित है। इसके बावजूद सीएम हेल्पलाइन सहित कई स्तरों पर की गई शिकायतों को नजरअंदाज किया गया। इससे आबकारी विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कलेक्टर की चुप्पी पर भी सवाल
अब निगाहें जिला प्रशासन और कलेक्टर पर टिकी हैं। जनता पूछ रही है।
क्या आबकारी अधिकारी का यह बयान कलेक्टर की मौन स्वीकृति से दिया गया?
यदि नहीं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या शासन के आदेश और सुप्रीम कोर्ट/राज्य सरकार की गाइडलाइंस केवल काग़ज़ों तक सीमित हैं?
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यदि इस बयान और मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो आबकारी अधिकारी प्रणय श्रीवास्तव पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
वहीं हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल प्रभाव से शराब दुकान हटाने और अधिकारी के बयान पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा।
यह मामला अब केवल शराब दुकान का नहीं, बल्कि आस्था बनाम प्रशासनिक हठधर्मिता का बन चुका है। कलेक्टर के लिए यह अग्निपरीक्षा है, या तो वे जनता के साथ खड़े हों, या फिर इतिहास यह दर्ज करेगा कि उनकी चुप्पी ने विवाद को और भड़काया।

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