घोट ग्राम पंचायत में अटल ग्राम सेवा सदन निर्माण पर सवाल, गुणवत्ता पर लगे आरोप

रेवांचल टाइम्स बिछियां मंडला मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आत्मनिर्भर पंचायत समर्थम मध्यप्रदेश, समृद्ध भारत अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में ग्राम पंचायत घोट में अटल ग्राम सेवा सदन (पंचायत भवन) का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है। इस भवन की स्वीकृत लागत लगभग 37.49 लाख रुपये है। उद्देश्य यह है कि ग्राम पंचायत को एक सुसज्जित, मजबूत और स्थायी भवन उपलब्ध कराया जा सके, जिससे ग्रामीणों को पंचायत से जुड़ी सेवाएं सुचारु रूप से मिल सकें।लेकिन निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों से जानकारी के अनुसार अभी भवन निर्माण कार्य पूर्ण भी नहीं हुआ है, जबकि प्लिंथ बीम के नीचे की ईंट की चिनाई में दरारें (क्रेक) दिखाई देने लगी हैं। यह स्थिति भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। विशेष रूप से यह बात सामने आई है कि प्लिंथ बीम के नीचे पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) नहीं डाली गई है, या फिर जमीन की कंपेक्शन (दबाव देकर मजबूती) सही तरीके से नहीं की गई। इसी कारण धीरे-धीरे जमीन में सेटलमेंट हो रहा है और उसका सीधा असर ईंट की चिनाई पर दिखाई दे रहा है।
जानकारों का कहना है कि यदि नींव और प्लिंथ स्तर पर इस तरह की लापरवाही की गई है, तो आगे चलकर भवन पर पड़ने वाला लोड सीधे बीम और दीवारों पर आएगा। इससे न केवल दीवारों में दरारें बढ़ेंगी, बल्कि बीम और कॉलम की मजबूती भी प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति लंबे समय में भवन के लिए खतरा बन सकती है। यदि इन्हीं दरारों पर प्लास्टर कर दिया गया, तो कुछ समय बाद क्रेक दोबारा उभरकर सामने आ जाएंगे। इससे न सिर्फ भवन की सुंदरता खराब होगी, बल्कि यह निर्माण में की गई गड़बड़ियों का स्पष्ट प्रमाण भी होगा।निर्माण स्थल पर कुछ जगहों पर हनीकॉम्ब जैसी स्थिति भी दिखाई दे रही है, जो कंक्रीट कार्य में लापरवाही का संकेत है। कंक्रीट ठीक से नहीं भरी गई या वाइब्रेशन सही तरीके से नहीं किया गया। इससे कंक्रीट की ताकत कम हो जाती है और सरिया के जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है।ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, मिक्सिंग और कार्यप्रणाली पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसके बावजूद संबंधित उपयंत्री द्वारा निर्माण कार्य की प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है। उपयंत्री घर बैठे ही मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
जब रेवांचल की टीम ने फोन के माध्यम से इस संबंध में उपयंत्री अरुण राणे से बात की, तो उन्होंने यह कहकर शिकायत को खारिज कर दिया कि “सब कुछ ठीक चल रहा है, कहीं कोई क्रेक नहीं है।” जबकि वास्तविकता यह है कि निर्माण स्थल पर दरारें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि या तो अधिकारी स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।वरिष्ठ अधिकारी द्वारा निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण नहीं किया गया है। न तो गुणवत्ता की जांच की गई है और न ही निर्माण कार्य की प्रगति का सही मूल्यांकन हुआ है। शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे सार्वजनिक भवनों के निर्माण में समय-समय पर तकनीकी और प्रशासनिक निरीक्षण अनिवार्य होता है। इसके बावजूद निरीक्षण का अभाव कई सवाल खड़े करता है।यदि समय रहते निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह भवन कुछ ही वर्षों में जर्जर अवस्था में पहुंच सकता है। इससे न केवल शासन के लाखों रुपये बर्बाद होंगे, बल्कि ग्रामीणों को जिस सुविधा के लिए यह भवन बनाया जा रहा है, वह उद्देश्य भी अधूरा रह जाएगा।मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। किसी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अटल ग्राम सेवा सदन जैसे महत्वपूर्ण भवन ग्रामीण विकास की रीढ़ होते हैं। यदि ऐसे भवन ही घटिया निर्माण और लापरवाही का शिकार हो जाएंगे, तो शासन की योजनाओं पर जनता का विश्वास कमजोर होगा। अब देखना यह है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।