भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने वी बी जी राम जी कानून पर कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर किया पलटवार, कानून के लाभ की दी जानकारी

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*कांग्रेस को केवल योजनाओं के नाम से मतलब, गरीबों के फायदे से कोई लेना देना नहीं: शेषराव यादव*

*भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई किसी भी योजना या नीति का विरोध करना का कांग्रेस ध्येय बना लिया: शेषराव यादव*

*नया कानून देता है ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी:शेषराव यादव*

*रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा*
भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने छिंदवाड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे के भाषण पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान कोई भी योजना शुरू की जाती थी तब उसका नाम नेहरू गांधी परिवार के नाम पर रखा जाता था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी भी योजना के क्रियान्वयन या उसके लाभ से कोई लेना देना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से नाम पर राजनीति करती आ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महात्मा गांधी के नाम का उपयोग किया लेकिन उनकी शिक्षा और नीतियों से कोई सरोकार नहीं रखा।

भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई किसी भी योजना या नीति का विरोध करना का कांग्रेस ध्येय बना लिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विरोध करने में ये भी नहीं देख रही है कि भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तुत योजना देश,  गरीब, महिला हितैषी है या नहीं।

नया कानून देता है ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी

भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने बताया कि वी बी जी राम जी कानून की प्रमुख विशेषता यह है कि ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी, जो मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों से 25 दिन अधिक है। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा मजबूत होगी और वे राष्ट्रीय विकास में अधिक योगदान दे सकेंगे। जहां सरकार ने इसे ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है, वहीं विपक्ष ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने का आरोप लगाया है।

विधेयक में मजदूरी भुगतान को अधिकतम 15 दिनों के भीतर देना किया गया अनिवार्य
भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने बताया कि विधेयक में मजदूरी भुगतान को साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों के भीतर अनिवार्य किया गया है। भुगतान में देरी होने पर श्रमिकों को मुआवजा देने का भी प्रावधान है। कृषि मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को 60 दिनों की विराम अवधि का विकल्प दिया गया है, ताकि श्रमिक बुवाई और कटाई के दौरान कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध रह सकें। इस कानून के तहत मिलने वाले कार्य चार प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े होंगे। इनमें जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका अवसंरचना, और मौसम प्रतिकूलता से निपटने के उपाय शामिल हैं।

केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 की साझेदारी
भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने बताया कि वित्तीय ढांचे के तहत केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 की साझेदारी होगी, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है। साथ ही प्रशासनिक व्यय की सीमा को 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण रोजगार को केवल कल्याणकारी योजना तक सीमित न रखकर उसे दीर्घकालिक विकास और परिसंपत्ति निर्माण का माध्यम बनाएगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने कहा कि मैं कांग्रेस नेताओं से कहना चाहता हूं कि किसी भी बिल या कानून का विरोध करने के पहले उसे अच्छे से समझ लें ताकि केवल विरोध करने ही होड़ में देश, गरीब और महिलाओं के लिए लाभकारी बिलों और कानूनों का विरोध ना कर बैठे।

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