जड़ों की ओर वापसी राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक ने उस स्कूल को संवारा, जहाँ 35 साल पहले ककहरा सीखा था

​मुजावरमाल के बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान कड़ाके की ठंड में मिले गर्म स्वेटर और उपहार

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रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|सफलता की ऊंचाइयों को छूने के बाद अपनी जड़ों और उस माटी को याद रखना ही सच्ची इंसानियत है। इसकी जीवंत मिसाल पेश की है राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक राकेश कुमार मालवीय ने। मालवीय ने मोहखेड़ विकासखंड के अंतर्गत संकुल केंद्र ड़ा के प्राथमिक विद्यालय मुजावरमाल और आंगनवाड़ी केंद्र में पहुंचकर बच्चों को उपहार भेंट किए। खास बात यह है कि इसी विद्यालय से मालवीय ने 35 वर्ष पूर्व अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी।
*​35 साल पुरानी यादें हुईं ताजा*
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। प्रधान पाठक महेश सालवंशी ने तिलक लगाकर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। इस भावुक अवसर पर राकेश मालवीय के साथ उनके पिता सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर चरण लाल मालवीय और माता श्रीमती अनुसुइया मालवीय भी उपस्थित थीं। मालवीय ने कहा, “मुजावरमाल का यह अंचल अपनी पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहाँ के प्राथमिक स्कूल में बिताए पल मेरे जीवन की सबसे अनमोल पूंजी हैं। मेरे पिता ने यहाँ वन विभाग में सेवाएं दी हैं, और इसी जुड़ाव के कारण हम बार-बार यहाँ खींचे चले आते हैं।”
*​86 बच्चों को मिली राहत और ख़ुशी*
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए आंगनवाड़ी के 34 बच्चों को शर्ट व बिस्किट तथा प्राथमिक शाला के 52 छात्र-छात्राओं को गर्म स्वेटर, पानी की बोतल और बिस्किट वितरित किए गए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।
*​’चलो मुस्कुराया जाए’ कविता से बांधा समां*
जनपद शिक्षा केन्द्र मोहखेड़ की ओर से बीएसी अरविंद भट्ट ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अपनी जड़ों की ओर लौटना ही समाज के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने इस अवसर पर “चलो मुस्कुराया जाए” शीर्षक वाली कविता सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिक्षक बलराम बरकोरिया ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले वंचित समुदाय के बच्चों के लिए यह एक बड़ी मदद और प्रोत्साहन है।
*​ये रहे उपस्थित*
कार्यक्रम में सरपंच रमेश पटेल, उपसरपंच मोहन भट्ट, गिरधारी भारत, कमलेश पवार, विनोद साहू, बासोड़ी पटेल, जनशिक्षक दिनेश यदुवंशी (सांवरी), संतोष डोंगरे (लिंगा), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मीरा मैडम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिक्षक और पालक उपस्थित रहे।

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