दमुआ–रामपुर-तानसी क्षेत्र में कोयला तस्करों का कहर..बंद खदानों को बना लिया ठिकाना, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

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रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|जुन्नारदेव सख्त आदेशों और प्रतिबंधों के बावजूद दमुआ–रामपुर-तानसी क्षेत्र में कोयले का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है। कोयला उत्खनन क्षेत्र झिरना, कोलवाशरी और नंदन में सक्रिय कोयला माफिया खुलेआम सरकारी नियमों को ठेंगा दिखा रहा है। आरोप है कि यहां बंद पड़ी खदानों और प्राइवेट खनन स्थलों से रोजाना लाखों रुपए का कोयला अवैध रूप से निकाला जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लल्लू और नाईजीरिया नामक व्यक्तियों की जोड़ी इस पूरे अवैध कारोबार को संचालित कर रही है। बताया जा रहा है कि यह गिरोह प्रतिदिन 15 से 20 ट्रैक्टर कोयला निकालकर रात के अंधेरे में परिवहन करता है। यह कोयला नवेगांव से लेकर बैतूल तक ईंट भट्टों सहित अन्य स्थानों पर सप्लाई किया जा रहा है।
*बंद खदानें बनीं माफिया का अड्डा*
जानकारी के अनुसार, पिछले कई दशकों से इन क्षेत्रों में भूमिगत व ओपन कास्ट खदानें संचालित थीं, जिन्हें समय आने पर बंद कर दिया गया। बंद खदानों में हजारों टन कोयला शेष रह जाने के कारण कोयला माफिया ने इन्हें अपना ठिकाना बना लिया है। प्राइवेट खंतियां खोदकर कोयला निकाला जा रहा है और उसे औने-पौने दामों में बेचा जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 15 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से कोयले की बिक्री हो रही है।
*जिम्मेदारों को रोजाना पहुंच रहा “लिफाफा”*
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार की जानकारी संबंधित विभागों और अधिकारियों को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
सुना जा रहा है और स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों तक रोजाना 10 से 15 हजार रुपए का “लिफाफा” पहुंचाया जा रहा है, जिसके चलते माफिया बेखौफ होकर कारोबार चला रहे हैं।
रात में होता है परिवहन
कोयले का अवैध परिवहन मुख्य रूप से रात के समय किया जाता है। ट्रैक्टरों और पिकअप वाहनों के जरिए कोयला ढोया जाता है। क्षेत्र में सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ और स्थानीय सुरक्षा बल तैनात होने के बावजूद अवैध परिवहन पर रोक नहीं लग पा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस अवैध खनन को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है और शासन को राजस्व की भी बड़ी क्षति पहुंच रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वही प्रशासन कब तक इस अवैध कोयला तस्करी पर लगाम लगाता है या फिर माफियाओं का यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा।

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