गणतंत्र दिवस का अपमान! नशे की हालत में स्कूल पहुँचा प्रभारी शिक्षक, बच्चों–ग्रामीणों के सामने पीता रहा भोजन ऐसे शिक्षक कैसे सँवारेंगे देश का भविष्य?

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26 जनवरी को शराबी शिक्षक, शिक्षा विभाग शर्मसार

रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले के विकास खण्ड भुआ बिछिया में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर शाला प्रभारी की अजब गज़ब तस्वीर सामने आई जा गणतंत्र दिवस रास्ट्रीय पर्व मनाने ग्रामीण स्कूल प्राँगण में एकत्रित हुए तो देखा कि शाला का मुखिया शिक्षक ही शराब के नशे में धुत है तब ग्रामीणों ने स्थानीय मीडिया बुलाया और कहा कि देखिए इस स्कूल के शिक्षक का क्या हाल है ये बच्चों को क्या भविष्य सवरेगे खुद तो खड़े नही हो पा रहें अजब है पर गजब है इस जिले के शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था जहाँ दोषी शिक्षक को सजा देने की बजय उल्टा मीडिया कर्मियों के पास जनप्रतिनिधि से लेकर बड़े बड़े लोगो का फोन आना शुरू हो गया किसी न कहा कि होता है खुशी के मौके में पी लिया है तो किसी ने कहा कि खबर न दिखाना जो विज्ञापन होगा के दे देंगे तो किसी ने कहा अगर कहा कि खबर दिखाई तो अच्छा नही होगा तरह तरह के शिक्षक के बचाव में जिम्मेदार ओर उनके चहेते मीडिया पर दबाव बना शुरू हुआ पर जैसे ही या बात दैनिक रेवांचल टाईम्स की टीम को बीडियो मिला तो बिना डरे ही बच्चों के भविष्य और राष्ट्रीय पर्व के मान सम्मान से समझौता न करते हुए ऐसे शिक्षक जो इस तरह के कृत करते है इनसे जनता और जिला प्रशासन के सामने लाना अनिवार्य था। जिससे बच्चों के भविष्य सवारने इन्हें महीने के लाखों रुपये इन्हें मेहनताना मिल रहा है पर ये अपनी जिम्मेदारी को भूल राजनीति करवा रहे है और अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे है।

वही देश के गणतंत्र दिवस जैसे पावन राष्ट्रीय पर्व पर जहाँ हर नागरिक को संविधान और राष्ट्र के प्रति सम्मान प्रकट करना चाहिए, वहीं मंडला जिले में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला पूर्णतः आदिवासी जिला है, जहाँ अजब गज़ब तस्वीरे सामने आ रही है वही विकास खण्ड भुआ बिछिया क्षेत्र के ग्राम बुधनवारा के समीप खैरोटोला प्राथमिक शाला में प्रभारी प्राचार्य मनोज पटेल 26 जनवरी 2026 को शराब के नशे की हालत में स्कूल प्रांगण में भोजन करते हुए पाए गए।
यह घटना उस समय हुई जब स्कूल परिसर में मीडिया कर्मियों के साथ साथ ग्रामीणजन, और गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल लोग मौजूद थे।
ग्रामीणों के सवाल पर कबूलनामा—“हां, मैंने शराब पी है”
जब स्थानीय ग्रामीणों ने प्रभारी प्राचार्य से उनकी हालत को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने खुलेआम स्वीकार किया—
“हां, मैंने शराब पी है।”
यह सुनते ही ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना है कि जो शिक्षक खुद राष्ट्रीय पर्व में नशे की हालत में पहुंचे, वे बच्चों को क्या संस्कार और अनुशासन सिखाएंगे?
शराब के साथ-साथ भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप ग्रामीणों ने प्रभारी प्राचार्य मनोज पटेल पर केवल नशे का ही नहीं, बल्कि स्कूल सामग्री की हेराफेरी के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार—
शासन से प्राप्त बड़े-बड़े गंजे (बर्तन) गायब हैं,
स्कूल के रैक और अलमारियाँ लापता हैं,
स्कूल परिसर पूरी तरह अस्त-व्यस्त है,
चैनल गेट टूटा हुआ है,
किताबें और कॉपियाँ इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं।
प्रभारी के भरोसे स्कूल, बच्चों का भविष्य अधर में
ग्रामीणों का कहना है कि जब स्कूल की जिम्मेदारी ऐसे लापरवाह और नशे में डूबे प्रभारी के हाथ में होगी, तो
बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?
शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा?
क्या आदिवासी अंचल के बच्चों को इसी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?
सीधे सवाल शिक्षा विभाग और प्रशासन से
अब सवाल सीधे-सीधे उठ रहे हैं—
बीईओ और बीआरसी को इस शिक्षक की हरकतों की जानकारी क्यों नहीं?
जनपद शिक्षा अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे?
क्या नशे में स्कूल पहुँचना अब अपराध नहीं रहा?
क्या राष्ट्रीय पर्व का अपमान करने वालों पर भी कार्रवाई नहीं होगी?
ग्रामीणों की चेतावनी—अब चुप नहीं बैठेंगे
घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का साफ कहना है कि—
“अगर इस शिक्षक पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई,
अगर स्कूल की सामग्री की जांच नहीं हुई,
और अगर शिक्षा विभाग ने आंखें बंद रखीं—
तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तय
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि
शिक्षक को तत्काल निलंबित किया जाए
नशे की हालत में ड्यूटी करने पर जाँच करते हुए एफआईआर दर्ज हो
स्कूल सामग्री की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो जिले और जिले के मुखिया कलेक्टर, सहायक आयुक्त
बीईओ संज्ञान में लेते हुए बच्चों के भविष्य सवारने वाले और अपने कर्तव्यों का सही निर्वाहन करने वाले ये शिक्षको पर कार्यवाही अत्यंत आवश्यक हैं

गणतंत्र दिवस पर सवाल

यह घटना सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर सवाल है।
अगर शिक्षक ही नशे में होंगे, तो देश कहा जायेगा और बच्चों का क्या होगा बड़ा सवाल

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