शासकीय शिक्षिकाओं को “वेंडर” बनाकर भुगतान का आरोप, आरटीआई में जानकारी नहीं देने पर प्रमुख सचिव से जांच की मांग

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जबलपुर। जनजातीय कार्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शासकीय कर्मचारियों — विशेष रूप से शिक्षिकाओं — को विभागीय प्रणाली में “वेंडर” बनाकर उनके खातों में भुगतान किया गया। जबकि नियमों के अनुसार नियमित शासकीय कर्मचारी का भुगतान उनके कर्मचारी कोड (Employee Code) के माध्यम से होता है, न कि वेंडर आईडी से।

इस संबंध में एक लिखित शिकायत दिनांक 11.01.2026 को प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग, भोपाल को भेजी गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि यह मामला जबलपुर जिले के अंतर्गत जनजातीय कार्य विभाग कार्यालय से संबंधित है। शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रारंभिक जांच में तीन शिक्षिकाओं के खातों में वेंडर के रूप में भुगतान दर्ज पाया गया।

किस प्रकार के भुगतान पर सवाल

पत्र में आशंका व्यक्त की गई है कि यह भुगतान संभवतः अंशकालीन कर्मचारियों के मद से किया गया होगा। आरोप है कि अंशकालीन कर्मचारियों के भुगतान में “कटौती/हेरफेर” कर राशि अन्य खातों में स्थानांतरित की गई हो सकती है तथा इसका विधिवत समायोजन (Adjustment) नहीं किया गया।

शिकायत में कुछ वेंडर नंबरों और भुगतान का विवरण भी संलग्न बताया गया है, जिनमें वर्ष 2014, 2015 और 2017 के विभिन्न महीनों में अलग-अलग राशियों का भुगतान दर्ज होने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक जानकारी है, जांच में और भी गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ सामने आ सकती हैं।

आरटीआई में जानकारी नहीं देने का आरोप

मामले में शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन दिनांक 19.08.2025 को लगाया था। आरोप है कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रथम अपील के बाद भी अपेक्षित सूचना नहीं मिली, जिसके बाद यह मामला उच्च स्तर पर उठाया गया है।

पत्र में यह भी आरोप है कि संबंधित कार्यालय द्वारा जानकारी उपलब्ध कराने में टालमटोल की जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने प्रमुख सचिव से पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराने, संबंधित भुगतान अभिलेखों का परीक्षण करने तथा यदि अनियमितता सिद्ध हो तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

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