नैनपुर में पट्टा वितरण का मामला लोकायुक्त के दरवाज़े पर
दस्तावेज़ों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग, प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में....

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले के विकास नैनपुर नगर में पात्र भूमिहीन परिवारों को पट्टा वितरण से जुड़ा मामला अब लोकायुक्त संगठन, मध्यप्रदेश तक पहुँच गया है। इस संबंध में पूर्व पार्षद एवं सामाजिक कार्यकर्ता रमजान खान द्वारा लोकायुक्त भोपाल को लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई है, जिसमें दस्तावेज़ों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
वही वर्ष 2019–20 के सर्वे में पात्र पाए गए, फिर भी पट्टे लंबित शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2019–20 में नगर के एक वार्ड में कराए गए सर्वे के दौरान पहले 19 तथा बाद में उन्हीं में से 13 हितग्राही पात्र पाए गए थे। संबंधित विभाग द्वारा पट्टे नगरपालिका को सौंपे जाने का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है, इसके बावजूद आज तक पात्र हितग्राहियों को पट्टे वितरित नहीं किए जा सके हैं।
जनसुनवाई से लेकर पीएम पोर्टल तक—हर दरवाज़ा खटखटाया शिकायतकर्ता रमजान खान का कहना है कि इस विषय को लेकर उन्होंने कलेक्टर जनसुनवाई, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सूचना का अधिकार (RTI), प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल
जैसे सभी वैधानिक माध्यमों पर आवेदन और पत्राचार किया, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है और न ही कोई ठोस निर्णय सामने आया है।
एक ही खसरे पर पहले भी हो चुका है पट्टा वितरण, मामले को और जटिल बनाते हुए शिकायत में यह भी बताया गया है कि संबंधित खसरा भूमि पर वर्ष 1998, 2008 और 2014 में पहले भी पट्टा वितरण किया जा चुका है। इसके चलते वर्तमान लंबित प्रक्रिया को लेकर भ्रम और संदेह की स्थिति बनी हुई है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट, लिखित और कारणयुक्त निर्णय देने की मांग की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना से भी वंचित हो रहे पात्र परिवार, पट्टा वितरण में हो रही देरी का सीधा असर पात्र परिवारों पर पड़ रहा है। शिकायत के अनुसार, कई पात्र हितग्राही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-Urban) के लाभ से भी वंचित हो रहे हैं, क्योंकि पट्टा न मिलने के कारण वे योजना की पात्रता पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
लोकायुक्त से न्याय की उम्मीद
शिकायतकर्ता ने उम्मीद जताई है कि लोकायुक्त संगठन के संज्ञान में आने के बाद दस्तावेज़ों के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी, प्रशासनिक भूमिका स्पष्ट होगी, और पात्र हितग्राहियों को उनका हक़ मिलेगा।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोकायुक्त संगठन इस प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और क्या वर्षों से लंबित पट्टा वितरण प्रक्रिया को गति मिल पाती है या नहीं।