मध्य प्रदेश सरकार का बजट: खाली डिब्बे जैसा, हर वर्ग के साथ हुआ खिलवाड़

20

 

*बजट नहीं उम्मीदों का डिब्बा निकला – विधायक पट्टा*

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला /मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने नाराज़गी दिखाते हुए कहा कि किसान, लाड़ली बहनें, नारी शक्तियाँ, नौजवान और मध्यम वर्ग—सभी को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट दस्तावेज़ देखने पर यह उम्मीदें सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह गईं।

उनके अनुसार केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता राशि में लगभग 50 हजार करोड़ रुपए की कमी सामने आई है, जो यह दर्शाती है कि राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर दबाव में है। इसका सीधा असर विकास योजनाओं, रोजगार कार्यक्रमों और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी को लेकर पिछले चुनाव में बीजेपी की सरकार ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा था कि 3100 रुपया प्रति क्विंटल पर खरीदी की जाएगी तो वही गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2700 रुपए प्रति क्विंटल दिया जायेगा। और सिंचाई योजनाओं पर कोई ठोस नई घोषणा नहीं हुई, वहीं लाड़ली बहना योजना में 3000 रुपया प्रति बढ़ोतरी की उम्मीद भी अधूरी रह गई। युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर भी बजट में कोई ठोस रोडमैप नहीं दिखा। महिलाओं के सशक्तिकरण की बात तो खूब की गई, लेकिन बजटीय प्रावधान सीमित रहे।

विधायक पट्टा का कहना है कि बजट में नई योजनाओं की घोषणा को लेकर भी कोई खास दिलचस्पी सरकार ने नहीं दिखलाई। घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत 450 रुपए पर देना सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल रखा था, लेकिन बजट में इसका कही भी जिक्र नहीं किया गया हैं। जिससे बजट को देखकर लगता हैं कि यह बजट जनविरोधी हैं। जिससे इस बजट से प्रदेश की जनता को भारी निराशा हुई हैं। इसके अलावा वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि पिछले बजट में जो सरकार द्वारा घोषणाएं की गई थी उसका क्या हुआ और अभी तक पूरा क्यों नहीं किया गया।

 

*बजट नहीं, उम्मीदों का डिब्बा निकला*

 

मध्य प्रदेश का बजट ऐसा निकला जैसे शादी में मिठाई का डिब्बा दिया जाए और खोलने पर अंदर से सिर्फ कागज़ निकले।

सरकार बोली – “सबका विकास”,

जनता बोली – “सबका धैर्य परीक्षण”।

किसान बोला – “फसल महंगी, मदद सस्ती।”

लाड़ली बहन बोली – “वादा भारी, रकम हल्की।”

नारी शक्ति बोली – “सम्मान भाषण में, पैसा फाइल में।”

नौजवान बोला – “रोजगार भाषण में, बेरोजगारी जीवन में।”

उधर 50 हजार करोड़ की कमी ऐसे पेश की गई जैसे घर में मेहमान आए हों और चाय के लिए चीनी खत्म हो गई हो —

सरकार ने कहा,

“केंद्र से कम आया है, इसलिए सबको कम मिलेगा।”

बजट में पुल हैं पर गड्ढे ज़्यादा,

योजनाएँ हैं पर पैसे कम,

घोषणाएँ हैं पर भरोसा नहीं।

कुल मिलाकर यह बजट जनता के लिए थाली नहीं,

आश्वासन का ढक्कन निकला है —

जिसे खोलने पर सिर्फ हवा मिली।

अब जनता पूछ रही है —

“जब खजाना खाली था,

तो भाषण इतना भरा-भरा क्यों था?”

Leave A Reply

Your email address will not be published.