
रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला ग्रामीण विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावे एक बार फिर कटघरे में हैं। जनपद पंचायत नारायणगंज की ग्राम पंचायतों में रूफटॉप सोलर ऊर्जा संयंत्र स्थापना के नाम पर लाखो की अनियमितताओं का आरोप सामने आया है। मामला अब “जांच के आदेश” और “प्रतिवेदन प्रस्तुत करने” तक सीमित होकर फाइलों में कैद नजर आ रहा है, जबकि जनप्रतिनिधि खुलकर इसे भ्रष्टाचार बता रहे हैं।
योजना का उद्देश्य क्या था

पंचायत राज संचालनालय, मध्यप्रदेश के पत्र क्रमांक पं.रा./5वें वित्त/2022/10062 भोपाल दिनांक 5 जुलाई 2022 तथा कलेक्टर मंडला के निर्देशों के अनुसार 5वें वित्त आयोग की राशि से ग्राम पंचायत कार्यालयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया था। उद्देश्य स्पष्ट था—पंचायत कार्यालयों में ऑनलाइन पोर्टल संबंधी कार्य समय-सीमा में पूरे हों।बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी शासकीय कार्य प्रभावित न हों।
सुशासन और सुव्यवस्थित कार्यालय प्रणाली को बढ़ावा मिले।निर्देशों में यह भी उल्लेख था कि पंचायतें आवश्यकता अनुसार 5वें वित्त की स्वीकृत राशि से सोलर पैनल और एलईडी लाइट्स क्रय कर सकती हैं।
आदेश और बैठक, लेकिन कार्रवाई शून्य
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत नारायणगंज द्वारा 4 मार्च 2025 को आदेश जारी किया गया। इसके बाद 23 जुलाई 2025 को आयोजित सामान्य सभा बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 11 के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में लगाए गए सोलर ऊर्जा पैनलों की जानकारी मांगी गई।
1 अगस्त 2025 को जारी आदेश में संबंधित सेक्टर अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने अपने पंचायत क्षेत्रों में स्थापित सोलर यूनिट की संपूर्ण जानकारी और जांच प्रतिवेदन तैयार कर जनपद में प्रस्तुत करें।कागजों पर प्रक्रिया पूरी होती दिख रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े कर रहा है। आदेश जारी होने के महीनों बाद भी किसी प्रकार की ठोस जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार
बिना टेंडर, सीधे खरीद का आरोप, लगभग 35 ग्राम पंचायतों में सोलर ऊर्जा इकाइयां लगाई गईं। आरोप है कि इन इकाइयों की स्थापना बिना विधिवत निविदा (टेंडर) प्रक्रिया अपनाए की गई। यदि यह आरोप सही हैं तो यह वित्तीय नियमों और पारदर्शिता के मानकों का सीधा उल्लंघन है।
जनपद सदस्य गुलाब सिंह परस्ते का कहना है कि उन्होंने स्वयं बाजार दर की जानकारी जुटाई। उनके अनुसार, एक सोलर यूनिट की वास्तविक कीमत लगभग 1.10 लाख से 1.50 लाख रुपये के बीच है, जबकि भुगतान 2.50 लाख रुपये या उससे अधिक के बिलों के आधार पर किया गया।यदि यह अंतर सही है तो प्रति यूनिट लगभग 1 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी की आशंका है। 35 पंचायतों के हिसाब से यह राशि 35 लाख रुपये से अधिक बैठती है—जो ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए चिंता का विषय है।
जांच टीम बेबस या मिलीभगत
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित हो चुका है, जांच के आदेश जारी हो चुके हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं क्या जांच टीम पर दबाव है क्या उच्च स्तर पर मिलीभगत है या फिर मामला जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है?
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इतने समय बीत जाने के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर न तो अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है और न ही वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि या खंडन हेतु कोई सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की गई है।
ग्रामीण विकास की कीमत पर खेल
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बिजली कटौती के कारण ऑनलाइन कार्य प्रभावित होते हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन, आवास योजना, श्रम पंजीयन, मनरेगा से जुड़े पोर्टल कार्य—सभी समयबद्ध होते हैं। सोलर संयंत्रों की स्थापना से ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बन सकती थीं।
लेकिन यदि योजना की आड़ में धन का दुरुपयोग हुआ है, तो यह केवल वित्तीय घोटाला नहीं बल्कि ग्रामीण जनता के अधिकारों से खिलवाड़ है। जिन संसाधनों से गांवों में विकास की रोशनी जानी थी, वही संसाधन भ्रष्टाचार की परछाईं बनते दिख रहे हैं।अब तक न तो जनपद पंचायत स्तर से कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी हुआ है और न ही कलेक्टर स्तर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण। यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को तत्काल तथ्य सामने रखने चाहिए। यदि आरोप सही हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई अपेक्षित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 5वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए
ई-टेंडरिंग अनिवार्य हो दर सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो
प्रत्येक पंचायत में लगाए गए सोलर यूनिट का तकनीकी निरीक्षण हो
भुगतान से पहले थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए
ग्रामीण क्षेत्रों में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन चुका है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे उच्च स्तर तक शिकायत ले जाएंगे। जनपद सदस्य गुलाब सिंह परस्ते ने स्पष्ट कहा है कि वे निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग हैं और दोषियों पर कार्रवाई चाहते हैं।
क्या होगा आगे अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।क्या जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाएगा क्या बिलों और बाजार दरों की तुलना कर ऑडिट होगा क्या दोषियों पर कार्यवाही या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह अलमारी में बंद होकर धूल फांकता रहेगा
सोलर ऊर्जा योजना का उद्देश्य था गांवों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और डिजिटल शासन को मजबूती देना। लेकिन यदि इस योजना में भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि शासन की विश्वसनीयता पर सीधा आघात होगा।जनपद पंचायत नारायणगंज का यह मामला अब एक बड़ी परीक्षा बन चुका है—क्या व्यवस्था स्वयं को साफ करेगी या फिर खामोशी ही
ग्रामीण विकास की असली रोशनी तभी आएगी, जब पारदर्शिता और जवाबदेही की किरणें भ्रष्टाचार के अंधेरे को चीरेंगी। अभी के लिए, जांच की फाइलें खुलने का इंतजार कर रही हैं—और जनता जवाब की।