राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में गड़बड़ी के आरोप, आखिर कब होगी दोषियों पर कार्रवाई

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रेवांचल टाइम्स निवास मंडला आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। महिलाओं के स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सदस्याओं ने नोडल अधिकारी सहित संबंधित पदाधिकारियों पर लगभग दो लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी, अवैध वसूली और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिलाएं शिकायत लेकर दर्जनों की संख्या में मंडला पहुंचीं और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लिखित शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
महिलाओं के अनुसार, 5 फरवरी 2026 को इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। इससे पूर्व अनुविभागीय अधिकारी को भी आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की गई थी। शिकायतकर्ताओं में सोमवती टेकाम, लक्ष्मी परस्ते और संगीता उलाड़ी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि नोडल अधिकारी पूजा शर्मा, सीआरपी सरोज नी और बैंक सखी शशि द्वारा समूहों के द्वितीय सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) की प्रक्रिया के नाम पर प्रति समूह तीन-तीन हजार रुपये की वसूली की गई।
महिलाओं का कहना है कि फोटो कॉपी, दस्तावेजी प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर यह राशि ली गई, जबकि सरकारी योजनाओं में इस प्रकार की वसूली का कोई प्रावधान नहीं है। पीड़ितों का आरोप है कि उनसे दबाव बनाकर राशि जमा करवाई गई और रसीद या स्पष्ट लेखा-जोखा भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
बिना हस्ताक्षर राशि आहरण का आरोप
भीखमपुर की सीएलएफ अध्यक्ष ने भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एबीएम शर्मा द्वारा बिना उनके हस्ताक्षर के राशि आहरण की जाती है। आरोप है कि जाली हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए, रिकॉर्ड स्वयं लिखा गया तथा सील और चेक रजिस्टर भी स्वयं के पास रखा गया।
सीएलएफ अध्यक्ष का कहना है कि संबंधित अधिकारी सीआरपी के खातों में राशि डालकर बाद में उसे वापस लेने के लिए कहती थीं। जब समूह की “दीदियों” के खातों में राशि जमा होती थी तो उन्हें बताया जाता था कि गलती से पैसा चला गया है, जिसे वापस करना होगा। महिलाएं विश्वास में आकर राशि निकालकर वापस कर देती थीं।
यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का घोर अभाव रहा और समूह की सदस्याओं को वास्तविक वित्तीय स्थिति से अनभिज्ञ रखा गया।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत, फिर भी सन्नाटा
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायतों को लंबित रखकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
महिलाओं का कहना है कि एनआरएलएम जैसी योजना का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन यदि योजना से जुड़े अधिकारी ही अनियमितताओं में लिप्त पाए जाते हैं तो यह शासन की मंशा और गरीब महिलाओं के विश्वास दोनों के साथ अन्याय है।
सवालों के घेरे में जवाबदेही
मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बिना हस्ताक्षर के राशि आहरण और जाली दस्तावेजों का आरोप सही है, तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता बल्कि आपराधिक कृत्य की श्रेणी में भी आ सकता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं को योजनाओं की तकनीकी जानकारी सीमित होती है, जिसका लाभ उठाकर कुछ अधिकारी मनमानी कर सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि संपूर्ण लेन-देन की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उनका कहना है कि दोषियों पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि वित्तीय अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
जांच और पारदर्शिता की मांग
पीड़ित समूहों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, बैंक खातों की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और समूहों को उनके अधिकारों की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
एनआरएलएम जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, यदि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरती है तो यह पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और क्या दोषियों को उनके कृत्यों की सजा मिलती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
मंडला की आदिवासी महिलाओं की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं आखिर कब होगा न्याय

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