दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में लगभग सभी सरकारी कार्यक्रम असफल हो रहे हैं खासकर जन समस्याओं के निराकरण के सभी अभियान व कार्यक्रम उपयोगी साबित नहीं हो पा रहे हैं ! सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई कार्यक्रम में लगातार आवेदक आवेदन पत्र दे रहे हैं लेकिन आवेदन पत्रों का निराकरण नहीं हो रहा है निराकरण नहीं होने की वजह से जिले में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है जनता का आक्रोश मंगलवार की जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने ही फूट गया और जनसुनवाई स्थल में बवाल मच गया। जहाँ मंगलवार को कलेक्टर परिसर योजना भवन में आयोजित जनसुनवाई मंडला जिले की सबसे बड़ी ‘जन-धोखा’ साबित हुई। । ग्रामीणों ने कलेक्टर की गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया, नारे लगाए, आवेदन फेंके। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार कलेक्टर पर आरोप लग रहे हैं कि इस दौरान एसडीएम के माध्यम से मीडिया को बाहर धकेल दिया गया। जब आवेदकों ने विरोध किया तो कलेक्टर ने खुद एक आवेदक को ललकारा
तुम ज्यादा नेतागिरी कर रहे हो, बाहर जाओ!’
देखते-ही-देखते 5-6 पुलिस वाले घुस आए। शांति व्यवस्था बनाई गई, लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। एक आवेदक ने तीखा सवाल किया।‘अखबारों में पढ़ते आए कि इतने आवेदन आए, लेकिन कभी नहीं पढ़ा कि इतनों का निराकरण हुआ!’ सही कहा। हर मंगलवार ढेर सारे आवेदन आते हैं, लेकिन समाधान? मुट्ठी भर। बाकी गरीब किराया लगाकर आते हैं, ‘छुनछुना’ सुनकर लौट जाते हैं। इस तरह की गड़बड़ी जिले में हो रही है लगातार जनसुनवाई में हो रही धांधली को लेकर समाचार भी प्रकाशित किये जा रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन द्वारा कोई परिणामकारी कार्यवाही नहीं की जा रही है यही वजह है कि मध्य प्रदेश की मंडला जिले में सरकारी तंत्र बेलगाम हो गया है और जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है सरकार को जागना होगा और यहां के सरकारी तंत्र को सही करना होगा ऐसा नागरिक चाह रहे हैं
बिजली के नाम पर लूट!
घुघरी विकासखंड की कचनारी पंचायत में तो स्थिति दर्दनाक है। सरई टोला, दुबाही कोन्हा, भाठिमार, मोटा टोला—कहीं सिर्फ खंभे खड़े हैं, बिजली नहीं। फिर भी 2015 से 2026 तक हर घर से 2500 से 5000 रुपये बिना रसीद वसूले जा रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी—‘सात दिन में बिजली नहीं लगी तो शासन-प्रशासन का बहिष्कार करेंगे।’
नर्मदा में रेत माफिया का राज!
गुरारखेड़ा-मोहनियापटपरा में नदी कट रही है, माफिया दिन-दहाड़े रेत निकाल रहा है। विभाग की मिलीभगत का आरोप।
मासूम की मौत के बाद सड़क पर सवाल!
बम्होरी में 12 मार्च को डंपर ने ढाई साल की बच्ची को कुचल दिया। अब ब्रेकर, साइन बोर्ड, सीसीटीवी की मांग। डंपर चालकों पर सख्ती की गुहार।
भ्रष्टाचार की चरम सीमा!
बीजाडांडी जनपद पंचायत की सीईओ वसंती दुबे पर सरपंचों-जनपद सदस्यों ने सामूहिक मोर्चा खोल दिया। कमीशन, फर्जी बिल, सांसद-विधायक निधि फाइलें रोके जाने, नव नियुक्त सचिवों के वेतन से वसूली—एक-एक आरोप खतरनाक। सरपंच बोलेआदिवासी क्षेत्र में यह लूट बंद नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे।
पुलिस, सहकारिता, नगरपालिका—हर जगह सड़ांध!
बीजाडांडी थाने के एएसआई छवि कांत सूर्यवंशी का स्थानांतरण करने की मांग जनसुनवाई में की गई है लैंम्पस प्रबंधक हेमराज यादव पर खाद्यान्न-खाद घोटाला, नगरपालिका से बिना सूचना हटाई गई महिला श्रमिक आरती यादव की गुहार, हलोन पुल की जर्जर रेलिंग, धौरगांव में सरपंच मीरा बाई पर शासकीय बोर पर कब्जा—हर शिकायत में एक ही बात: ‘पहले भी आवेदन दिए, कोई कार्रवाई नहीं।
मृत मजदूर का संबल कार्ड तक नहीं!
घाघा गांव में अनूप यादव की मौत के बाद परिवार को संबल योजना का लाभ तक नहीं मिला। पैतृक रास्ता रोका, कुम्हार समाज को भूमि नहीं, धान का भुगतान अटका, होली समारोह का खर्च लंबित, डूब क्षेत्र में बाहरी अवैध खेती, भूमि अधिग्रहण में किसानों की आपत्ति—सब कुछ जनसुनवाई में आया, लेकिन कलेक्टर साहब सिर्फ सुनते रहे। इस तरह से कई आवेदन पत्र आए लेकिन निराकरण नहीं हो रहा है जिसकी वजह से पूरे जिले में भारी आक्रोश पनप गया है
जनसुनवाई बंद करो या समाधान दो!
ग्रामीणों का सीधा सवाल—