दिव्यांग बच्चों के सम्मान के साथ मनाया गया शाला प्रवेश उत्सव, शिक्षा से जोड़ने पर विशेष फोकस

रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला नारायणगंज विकासखंड में नए शिक्षण सत्र की शुरुआत समावेशी शिक्षा के सशक्त संदेश के साथ की गई। शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर दिव्यांग बच्चों का विद्यालयों में नामांकन कर उनका विशेष सम्मान किया गया। विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों का तिलक लगाकर, पुस्तकें भेंट कर तथा हार-फूल पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।
समावेशी शिक्षा के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। एमआरसी शेख इरफ़ान ने बताया कि इस उत्सव का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि विकासखंड में इन बच्चों को शिक्षा गुणवत्ता, विद्यालय में ठहराव, मेडिकल प्रमाण पत्र, भत्ते, सहायक उपकरण एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जा रही हैं।
जनपद शिक्षा केंद्र नारायणगंज की टीम—बीएसी, एमआईएस, लेखापाल एवं अन्य कर्मचारियों के सहयोग से यह अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत पात्र बच्चों को आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही संसाधन केंद्रों में बच्चों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी क्रम में प्राथमिक शाला चंदेहरा में श्रवण बाधित बालिका खुशी धुर्वे का कक्षा 1 में प्रवेश कराया गया। शिक्षक सूरज मरावी ने बच्ची की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का संकल्प लेते हुए उसे बेहतर शैक्षणिक स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने की बात कही।
प्रवेशोत्सव के दौरान पूरे विकासखंड में दिव्यांग बच्चों का सम्मान कर उनके और उनके अभिभावकों में आत्मविश्वास का संचार किया गया।
प्रवेश से पुनर्वास तक विशेष फोकस
6 से 18 वर्ष तक के प्रत्येक दिव्यांग बच्चे का चिन्हांकन एवं नामांकन
• विद्यालय में सम्मानपूर्वक स्वागत कर मनोबल बढ़ाना
• मेडिकल सर्टिफिकेट एवं UDID कार्ड बनवाना/नवीनीकरण
• 3000 से 10,500 रुपये तक भत्ता एवं छात्रवृत्ति
• साइकिल, ट्रायसाइकिल, सीपी चेयर, वॉकर, व्हीलचेयर व टीएलएम किट उपलब्ध कराना
• शिक्षकों के लिए ब्रेल एवं सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण
इनका कहना है:
“कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए समाज के सभी जिम्मेदार नागरिकों, शिक्षकों और पंचायत प्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए।”
बीआरसी कमलेश भावेदी
वहीं सहायक परियोजना समन्वयक के.के. उपाध्याय ने बताया कि जिले में समावेशी शिक्षा के तहत ब्रेल एवं सांकेतिक प्रशिक्षण, मेडिकल प्रमाण पत्र, उपकरण वितरण शिविर तथा ALIMCO एवं जिला मेडिकल टीम के सहयोग से लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ा जा सके।