शासकीय भूमि पर कब्जे का खेल? ऑनलाइन खसरे में नाम दर्ज, जिला प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
दैनिक रेवांचल टाईम्स, मंडला:मंडला जिले के ग्राम धौरगांव में शासकीय भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने एक बार फिर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज करने का खेल खुलेआम खेला जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
ग्राम निवासी रमेश प्रसाद सिंगौर ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि खसरा नंबर 857, रकबा 0.39 हेक्टेयर, जो पूर्व में शासन के नाम दर्ज थी, उसमें कथित रूप से पहले हस्तलिखित खसरे में एक व्यक्ति का नाम जोड़ा गया और अब राजस्व प्रकरण के माध्यम से उसी नाम को ऑनलाइन खसरे में भी दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर शासकीय भूमि, जो सार्वजनिक संपत्ति होती है, उसे किस आधार पर और किन नियमों के तहत निजी नाम पर दर्ज किया जा रहा है? क्या यह सब बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के संभव है?
आवेदक का आरोप है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रही। इससे साफ जाहिर होता है कि या तो प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि शासकीय भूमि ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करे? यह मामला न सिर्फ एक गांव की जमीन का है, बल्कि पूरे जिले में चल रही संभावित गड़बड़ियों की ओर भी इशारा करता है।
प्रश्न यह भी उठता है कि जब भूमि पहले से शासन के नाम दर्ज थी, तो फिर उसमें परिवर्तन करने की प्रक्रिया इतनी आसानी से कैसे पूरी हो गई? क्या संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की या फिर किसी दबाव में आकर यह निर्णय लिया गया?
रमेश प्रसाद सिंगौर ने मांग की है कि संबंधित आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
शासकीय भूमि पर हो रहे इस कथित खेल ने एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।