जहाँ नर्मदा बहती है, वहाँ गन्नू बहा रहा है शराब…

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नर्मदा तट पर ‘शराब मुक्त जिला’ में पुलिस की छाया में चल रहा ‘गन्नू का शराब अवैध कारोबार’ …. मस्जिद के सामने शर्मनाक धंधा, शासन मौन
“तो सवाल ये है …. जब नर्मदा किनारे शराब बेचना कानूनन अपराध है…
और मस्जिद के सामने बेचना सामाजिक अपराध…
तो फिर गन्नू किस संविधान के तहत शराब बेच रहा है?”

नर्मदा के नाम पर शराबबंदी का झुनझुना, ज़मीन पर ‘गन्नू की सरकारी दुकान’
डिण्डोरी ज़िला, नर्मदा किनारा।
राज्य सरकार की घोषित शराबबंदी नीति लागू है।
यानी इस पवित्र क्षेत्र में एक बूँद शराब बेचना अपराध है।
लेकिन ज़मीन पर क्या हो रहा है?
मस्जिद के सामने गन्नू टेबल पर बोतलें सजाता है, ग्राहक आते हैं, नशे में धुत होते हैं …. और पुलिस, सरकार, प्रशासन सब जैसे अनदेखा करने की कसम खाकर बैठे हैं।

“गंगा-जमुनी तहज़ीब नहीं, अब है गन्नू की शराबी तहज़ीब”
जिस जगह नर्मदा की आरती होती है, वहाँ अब गालियाँ गूंजती हैं।
जहाँ इबादत की आवाज़ होनी थी, वहाँ अब बोतलों की खनक सुनाई देती है।
ये सिर्फ कानून की हत्या नहीं है …. ये आस्था की चीरहरण है।

डिण्डोरी में शराबबंदी है, लेकिन “गन्नू के लिए नहीं”
स्थानीय लोग कहते हैं ….
“हमने तो सुना था कि डिण्डोरी शराब मुक्त जिला है, लेकिन लगता है गन्नू के लिए नियम अलग हैं।”
“उसका हफ्ता पहुँचता है, तभी तो पुलिस उसकी दुकान को ठेका समझ बैठी है!”

कलेक्टर, एसपी, थाना प्रभारी… सबका नाम शिकायतों में दर्ज है …. लेकिन कार्रवाई? ZERO!
मस्जिद कमेटी, मोहल्लेवासियों ने थाने से लेकर मुख्यमंत्री तक सबको शिकायती चिट्ठी भेजी।
लेकिन जवाब में मिला सिर्फ सन्नाटा।
क्यों? क्या गन्नू की जेब से सत्ता का सुकून आता है?

“यह सरकार शराबबंदी की बात करती है, या ‘शराबबाजों’ की बंदगी करती है?”
क्या मोहन सरकार की शराबबंदी सिर्फ विज्ञापनों और मंचों के लिए है?
क्या डिण्डोरी अब ‘माफिया मुक्त जिला’ नहीं, ‘माफिया संरक्षित जिला’ बन चुका है?
क्या गन्नू अब थाना प्रभारी का बॉस है, और जनता उसकी गुलाम?

नर्मदा किनारे की ज़मीन अब पवित्र नहीं, बल्कि नशे से सनी हुई लगती है
और ये सब तब हो रहा है, जब प्रदेश सरकार हर मंच से कहती है ….
“जहाँ नर्मदा है, वहाँ शराब नहीं”।
तो फिर डिण्डोरी में क्या है?
नर्मदा की पूजा, या गन्नू की सत्ता?

अब सिर्फ सवाल नहीं, कार्रवाई चाहिए… नहीं तो जनता पूछेगी
“क्या नर्मदा के घाटों पर भी अब गन्नू के बोर्ड लगेंगे?”
मुख्यमंत्री जी, ये सिर्फ जिला प्रशासन की नाकामी नहीं …. ये आपकी शराबबंदी नीति की असफलता है।
अब चुप रहना आपकी भी हिस्सेदारी साबित करेगा।
मुकेश श्रीवास
(जहाँ धर्म, समाज और कानून का चीरहरण होता है …. वहाँ कलम से क्रांति शुरू होती है)

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