भोमा शासकीय स्कूल में रसायन शास्त्र की पढ़ाई ठप, अतिरिक्त प्रभार में उलझे शिक्षक – बच्चों का भविष्य अंधकार में!

रेवांचल टाइम्स भोमा सिवनी जिले के पी.एम. श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोमा में शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है। यहाँ पदस्थ रसायन शास्त्र विषय के शिक्षक श्री संजीव कुमार राय को दिनांक 28 नवम्बर 2024 को समग्र शिक्षा लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के आदेश क्रमांक /समग्र शिक्षा/सिवनी/2024-25/3341 के अनुसार सहायक जिला परियोजना समन्वयक (सेकेंडरी एजुकेशन) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
मुख्य जिम्मेदारी भूले शिक्षक, पढ़ाई ठप
आरोप है कि अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद से श्री राय विद्यालय में न तो एक भी पीरियड ले रहे हैं और न ही विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। वे लगातार जिले के कार्यालयी कार्यों में ही व्यस्त हैं। इसका सीधा खामियाजा भोमा विद्यालय के विद्यार्थी भुगत रहे हैं।
न वैकल्पिक व्यवस्था, न अतिथि शिक्षक
विद्यालय के प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी सिवनी की लापरवाही यहाँ साफ दिखाई देती है।
अब तक किसी भी अतिथि शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है।
न ही पोर्टल पर रिक्त पद प्रदर्शित किया गया है।
रसायन शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषय की कक्षाएँ पूरी तरह बंद हैं।
तिमाही परीक्षा सिर पर – लेकिन शिक्षक नदारद
28 नवम्बर से विद्यालय में तिमाही परीक्षा भी प्रारंभ हो रही है। परंतु विद्यार्थियों को अब तक पढ़ाया ही नहीं गया। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि बिना पढ़ाई के ये परीक्षाएँ बच्चों के भविष्य को कहाँ ले जाएँगी।
गंदगी, पानी भराव और भ्रष्टाचार ने बढ़ाई समस्या..
विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि भौतिक हालात भी बेहद दयनीय हैं।..
कक्षाओं में लगातार पानी भरने की समस्या।..
बाथरूम इतने गंदे कि उपयोग करना तक संभव नहीं।…
वहीं, विद्यालय में भारी भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं, जिनके मुख्य किरदार खुद संजीव राय बताए जा रहे हैं।
जिम्मेदारी से भागता शिक्षा विभाग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि –
क्या जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा भोमा विद्यालय की मॉनिटरिंग की गई?..
यदि नहीं, तो आखिर क्यों नहीं?…
क्या कलेक्टर महोदय मामले को संज्ञान में लेकर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे?…
अभिभावकों की मांग – कलेक्टर करें निरीक्षण
अभिभावकों और ग्रामीणों का साफ कहना है कि अब कलेक्टर महोदय को स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करना चाहिए। तभी वास्तविक स्थिति उजागर होगी और बच्चों की पढ़ाई पटरी पर लौट सकेगी।
भोमा शासकीय विद्यालय शिक्षा विभाग की लापरवाही का शिकार हो गया है। जहाँ एक ओर शिक्षक अतिरिक्त प्रभार में जिले के दफ्तर तक सीमित हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जब इस विषय पर शिक्षक से पूछा गया तो
-शिक्षक का कहना है कि मैं ऑनलाइन क्लासेस भी ले लेता हूं और मेरा रिजल्ट बहुत अच्छा है आपको जिसने भी बताया है उसने गलत जानकारी दी है.