सिकल सेल एनीमिया प्रबंधन में परंपरागत वैद्यों की चिकित्सा पद्धति का उन्नयन और संवर्धन में योगदान एवं एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न

 

रेवाँचल टाईम्स – मण्डला, मध्यप्रदेश आयुर्वेद होम्योपैथी कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राधेलाल नरेटी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि विगत दिवस एकलव्य आदर्श विद्यालय परिसर,आॉडिटोरियम सेमरखापा मण्डला मध्यप्रदेश में संपन्न हुआ‌ । सिकल सेल एनीमिया के प्रबंधन में परंपरागत‌ वैद्यों की एवं उनके कौशल उन्नयन के संबंध में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । यह कार्यशाला आयुष विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयोजित की गई है,जो राज्य में पारंपरिक उपचार पद्धतियों के पुनरोत्थान, स्वास्थ्य जागरूकता और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल गरिमामय उपस्थिति रही ,माननीय मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहें:-
• डॉ. कुंवर विजय शाह, मंत्री, जनजातीय कार्य, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पर्यावरण, एवं पुनर्वास विभाग।
• श्रीमती संपतिया उइके माननीय मंत्री, मध्यप्रदेश शासन लोक निर्माण एवं यांत्रिकी विभाग

कार्यशाला का उद्देश्य और महत्व

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को रेखांकित करना और उन्हें आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करना है।आयुर्वेद, योग, सिद्ध, होम्योपैथी जैसी पद्धतियों की भूमिका न केवल उपचार तक सीमित है, बल्कि वे निवारक स्वास्थ्य देखभाल और जीवनशैली आधारित रोगों की रोकथाम में भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं । महामहिम जी एवं अन्य अतिथियों की उपस्थिति में सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित बच्चों से वार्तालाप कर बच्चों के द्वारा आयुष की औषधी से प्राप्त लाभ का बेहतर अनुभव साझा किया।

विशेष फोकस: सिकल सेल एनीमिया प्रबंधन:-
कार्यशाला का एक प्रमुख विषय सिकल सेल एनीमिया है, यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आती । इसका समाधान केवल औषधीय उपचार से नहीं, बल्कि पोषण, जीवनशैली, जन-जागरूकता और पारंपरिक औषधियों के माध्यम से भी संभव है। इस कार्यशाला में विशेष‌त: एनीमिया के कारणों, लक्षणों, और आयुष पद्धति द्वारा इसके प्रभावी प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी गई। आयुष विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई।

जनजातीय क्षेत्र में विशेष महत्व:-

मण्डला जिला जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों का गहरा प्रभाव है एवं लोगों में पीढ़ियों से औषधीय पौधों, प्राकृतिक चिकित्सा और घरेलू नुस्खों का उपयोग बाहुल्ता से होता है। कार्यशाला के माध्यम से इन पारंपरिक ज्ञानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर स्वास्थ्य संवर्धन की ओर एक दिशा में प्रदान की गई है।

उम्मीदें और परिणाम:-

यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सिकल डेवेलपमेंट के अवसर भी प्रदान करेगा। साथ ही, यह पहल राज्य में आयुष चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करेगी और “स्वस्थ मध्यप्रदेश” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

कार्यशाला का आयोजन आयुक्त संचालनालय आयुष म.प्र. आर.उमामहेश्वरी के मार्गदर्शन में आयोजित हुई ।डॉ.उमेश शुक्ला प्राचार्य महाविद्यालय भोपाल के सत्र का क्रियान्वयन हुआ ।
वही कार्यशाला में विधायक चैन सिंह वरकड़े निवास, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, प्रमुख सचिव डी.पी. अहूजा, डॉ.रवि नारायण आचार्य,संभाग आयुक्त धऩजयसि़ह,आई जी बालाघाट, संजय सिंह,डी आई जी बालाघाट, मुकेश कुमार श्रीवास्तव, कलेक्टर सोमेश मिश्रा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रेयांश कूमट, पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा, प्रफुल्ल मिश्रा भाजपा जिलाध्यक्ष, विनोद कछवाहा नगरपालिका अध्यक्ष, आयुर्वेद महाविद्यालय जबलपुर प्राचार्य संभागीय आयुष अधिकारी डॉ.अर्चना मरावीं, जिला आयुष अधिकारी डॉ.गायत्री अहाके सहित विभिन्न जिलों से अधिकारी कर्मचारी परंपरागत वैद्य बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद थे।साथ ही साथ मण्डला जिले के अधिकारियों कर्मचारियों के सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ।

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