“दारू दुकान की ‘डोर स्टेप डिलीवरी’: सड़क पर खड़ी कारों में पहुंचाई जा रही शराब”

"विजयनगर और सदर क्षेत्र में खुलेआम कानून को ठेंगा, ट्रैफिक और सुरक्षा नियमों की उड़ रही धज्जियां"

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विशेष सुविधा या खुलेआम अव्यवस्था?

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर के *विजयनगर और सदर क्षेत्र* में स्थित शराब दुकानों में इन दिनों एक नई तरह की “ग्राहक सेवा” देखने को मिल रही है। शराब लेने वालों को अब दुकान पर जाकर लाइन में लगने की जरूरत नहीं — बस गाड़ी रोड किनारे खड़ी कीजिए, और दुकान के लड़के खुद शराब लेकर आपकी कार तक पहुंचा देंगे।

यह सुविधा सुनने में भले ही सुविधाजनक लगे, लेकिन इसके पीछे छुपी है एक बड़ी ट्रैफिक और कानून व्यवस्था की समस्या

सड़क पर गाड़ियां, फुटपाथ पर भीड़, आम राहगीर परेशान

सर्विस रोड हो या फुटपाथ, शराब दुकानों के आस-पास हर जगह गाड़ियां खड़ी मिलती हैं। इससे आम लोगों और राहगीरों को *चलने तक की जगह नहीं मिलती। खासकर शाम के समय, जब शराब की बिक्री चरम पर होती है, इन इलाकों में भारी जाम और अव्यवस्था देखी जा सकती है।

लोगों का कहना है कि –
“दारू दुकान के बाहर इतना जाम लगता है कि न पैदल चल सकते हैं, न गाड़ी निकाल सकते हैं, और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है।”

दुकानों के लड़कों द्वारा की जा रही ‘सड़क डिलीवरी’

शराब दुकानों ने बाकायदा अपने लड़के तैनात कर रखे हैं जो ग्राहकों की कार तक जाकर शराब, डिस्पोजल ग्लास, पानी की बोतल और चकना की चीजें पहुंचा रहे हैं। यह पूरा काम सड़क के किनारे – आम जनता और ट्रैफिक नियमों को नजरअंदाज करते हुए किया जा रहा है।

यह स्थिति न केवल सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि *mकिसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका* बनी रहती है।

सदर में भी हालात जस के तस

सदर क्षेत्र में भी यही हाल है। यहाँ भी शराब दुकान के बाहर जाम, अवैध पार्किंग और खुलेआम शराब की सड़क पर बिक्री आम हो चुकी है। लोगों को अपनी गाड़ियों के बीच से रास्ता निकालना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रशासन की चुप्पी, पुलिस की निष्क्रियता

सवाल उठता है कि आखिर ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस खुलेआम अव्यवस्था के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
क्या शराब दुकानों को नियमों से ऊपर माना जा रहा है?

एक स्थानीय नागरिक ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा –
“यह दुकानें अब शराब बिक्री केंद्र नहीं, बल्कि सड़कों पर अराजकता का अड्डा बन गई हैं।”

जनहित में कार्रवाई की आवश्यकता

अब समय आ गया है कि प्रशासन इस तरह की “शराब डिलीवरी व्यवस्था” पर रोक लगाए,

* सड़क किनारे अवैध पार्किंग को हटाए
* दुकानों के बाहर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करे
* और शराब दुकानों को नागरिक अधिकारों और कानून का पालन कराने के लिए बाध्य करे।

यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में विजयनगर और सदर जैसे क्षेत्र सिर्फ ट्रैफिक जाम ही नहीं, बल्कि अपराध और असुरक्षा के पर्याय बन जाएंगे।

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