शान से दी गई लालबाग के बादशाह, मोहन नगर के राजा, छिन्दवाड़ा के महाराजा और परतला के महाराजा को बिदाई

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ाअनंत चतुदर्शी के बाद लालबाग के बादशाह, मोहन नगर के राजा और छिंदवाड़ा के महाराजा की शोभायात्रा उत्साह के साथ निकली। शहर में हर तरफ उल्लास और भक्ति भाव का माहौल देखने को मिला। खासकर श्रध्दालु भक्तों का उत्साह उस समय और भी बढ़ गया जब हल्की बरसात के बीच लालबाग के बादशाह और मोहन नगर के राजा की प्रतिमा आमने सामने आ गई। और यहां हर साल ऐसा ही अदभुत संयोग देखने को मिलता है। हालांकि कई बार यहां पर और छिंदवाड़ा के महाराजा की प्रतिमा आमने सामने आ जाती थी लेकिन इस बार मोहन नगर के राजा और लालबाग के बादशाह एक साथ शोभायात्रा में नजर आए जिसका लोगों ने काफी लुत्फ उठाया और गणपति बप्पा मोरया के जयघोष लगाए। देर शाम तक तीनों प्रतिमाओं का चल समारोह चलता रहा।
मोहन नगर के राजा और लाल बाग के बादशाह आमने-सामने थे तो
उसे समय छिंदवाड़ा के महाराजा परशुराम वाटिका के पास महाराज का पूजन चल रहा था l
भक्तगण द्वारा यह भी सुना गया महाराजा तो महाराज की स्टाइल में चलते हैं महाराज का विसर्जन 4:00 बजे संपन्न हुआ देर रात तक कलेक्टर शीलेंद्र सिंह, आईपीएस आयुष गुप्ता,एडीएम धीरेंद्र सिंह, एसडीएम सुधीर जैन,अपने स्टाफ सदस्य के साथ विसर्जन स्थल पर मौजूद रहे
परतला में महाराजा मौन के साथ हुए विदा छिंदवाड़ा में आज भगवान श्रीगणेश को विदा
करने का सिलसिला जारी रहा। शहर के परतला क्षेत्र में विराजित परतला के महाराजा समिति की मांग थी कि उन्हें भारी भरकम डीजे की अनुमति दी जाए लेकिन प्रशासन ने नहीं दी और समिति ने बिना डीजे के मौन रूप से शोभायात्रा निकाली और प्रतिमा को छोटा तालाब तक शोभायात्रा के साथ ले गए और उन्हें पूजा अर्चना के साथ विदा किया।
प्रशासन की सक्रियता और पुलिस द्वारा हर विसर्जन यात्रा के साथ उनकी मौजूदगी
पुलिस अधीक्षक निवेदिता गुप्ता और प्रशासन की सक्रियता और पुलिस द्वारा हर विसर्जन यात्रा के साथ उनकी मौजूदगी से कोई भी अप्रिय घटना नहीं घटी।
यह पुलिस प्रशासन की एक सफल रणनीति को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसका श्रेय न केवल पुलिस अधीक्षक को, बल्कि पूरी पुलिस टीम को जाता है, जिन्होंने समन्वय और समर्पण के साथ काम किया। लोगों का पुलिस की इस पहल की सराहना करना, उनकी कड़ी मेहनत और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है।
इस तरह की सकारात्मक व्यवस्थाएं भविष्य में भी सार्वजनिक आयोजनों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती हैं।