कान्हा टाइगर रिजर्व से जंगली हाथी को सड़क मार्ग द्वारा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वनक्षेत्र में छोड़ने हेतु रवाना

रेवांचल टाईम्स – मंडला, वन विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की गंभीर परिस्थितियों से निपटने एवं जंगली हाथियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जनवरी-फरवरी, 2024 में छत्तीसगढ़ राज्य से आए जंगली हाथियों का दल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के ग्राम क्षेत्रों में प्रवेश कर गया था। इन हाथियों ने ग्रामीणों के मकानों को क्षति पहुँचाई, फसलों को नुकसान पहुँचाया तथा मानव जनहानि एवं घायल होने की घटनाएँ भी दर्ज की गईं। मानव जीवन के लिये खतरा उत्पन्न होने एवं हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 11 (1) (ए) के अंतर्गत हाथियों को पकड़ने के आदेश जारी किए गए एवं इस संबंध में एक समिति का गठन किया गया।

 

समिति की अनुशंसा के आधार पर पकड़े गए जंगली हाथियों को सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ एवं कान्हा टाइगर रिजर्व में अस्थायी रूप से कैप्टिविटी में रखा गया, जहाँ उनके स्वास्थ्य की निगरानी, व्यवहार का वैज्ञानिक आकलन और खुले वन क्षेत्र में पुनर्वास की संभावना का परीक्षण किया गया। बांधवगढ़ में रखे गए हाथी को पूर्णतः स्वस्थ और उपयुक्त पाए जाने पर 20/11/2024 को खुले वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। दूसरी ओर, कान्हा टाइगर रिजर्व में रखे गए हाथी को स्वास्थ्यगत समस्याओं के कारण तत्काल नहीं छोड़ा जा सका और उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की देख-रेख में उपचार एवं पुनर्वास कार्यक्रम के तहत किसली परिक्षेत्र के अंतर्गत कोपेडबरी हाथी केम्प वेटनरी केयर फेसिलिटि में रखा गया।

 

दिनांक 18/08/2025 को आयोजित एलिफेंट एडवायजरी कमेटी की बैठक में कान्हा में रखे गए जंगली हाथी को पूर्णतः स्वस्थ और प्राकृतिक व्यवहार के लिये सक्षम पाया गया। समिति ने अनुशंसा की कि इस जंगली हाथी को सैटेलाइट रेडियो कॉलर लगाकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खुले वन क्षेत्र में छोड़ा जाए, ताकि उसके मूवमेंट और व्यवहार की वैज्ञानिक निगरानी की जा सके।

 

आज दिनांक 09/09/2025 को सुबह 08 बजे कान्हा टाइगर रिजर्व से उक्त जंगली हाथी को सुरक्षित रूप से परिवहन ट्रक द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुये बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खुले वन क्षेत्र में छोड़े जाने हेतु रवाना किया गया। इस अवसर पर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, भा.व.से., क्षेत्र संचालक, श्री पुनीत गोयल, भा.व.से., उप संचालक, डॉ. संदीप अग्रवाल, वन्यजीव चिकित्सक, कान्हा टायगर रिजर्व सहित वन अधिकारी एवं क्षेत्रीय कर्मचारी उपस्थित रहे। यह पहल स्थानीय ग्रामीण समुदायों को राहत प्रदान करने के साथ-साथ जंगली हाथियों के संरक्षण एवं उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। सैटेलाइट रेडियो कॉलरिंग के माध्यम से भविष्य में जंगली हाथी के व्यवहार और मूवमेंट की सटीक जानकारी उपलब्ध होगी, जो मानव-जंगली हाथी संघर्ष को कम करने की रणनीतियों के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।

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