क्या कभी पूरा होगा जबलपुर–मंडला राष्ट्रीय राजमार्ग?
वर्षों से अधूरा, जवाबदार मौन – ठेकेदारों की मनमानी से सड़क बनी "सदी का अधूरा सपना"
रेवाँचल टाईम्स – मंडला मध्य प्रदेश का मंडला जिला आज भी टूटी-फूटी सड़कों की दंश झेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले में कोई भी सड़क पूरी तरह दुरुस्त नहीं मिलती। जो सड़कें बन भी रही हैं, उनकी गुणवत्ता पर जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते पानी फेर दिया जाता है। परिणाम यह है कि करोड़ों की लागत से बनी सड़कें कुछ महीनों में ही दम तोड़ती नज़र आती है और ज़्यादा से ज़्यादा साल–दो साल में ही पूरी तरह से दम तोड़ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है —
आखिर कब पूरा होगा जबलपुर–मंडला राष्ट्रीय राजमार्ग?
वर्षों से लटका काम – जिम्मेदार बने तमाशबीन
कई सालों से इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य आज भी अधर में लटका है। इस और न जनप्रतिनिधि सुध ले रहे हैं, और न ही जिम्मेदार प्रशासनिक अमला न ही विभाग कार्रवाई कर रहा है,
ठेकेदारों की मनमानी और लापरवाही खुलेआम है जारी
हाइवे के हालात इतने बदतर हैं कि सड़क में लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। जगह-जगह सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है, पुल में बड़े बड़े गड्डे हो चुके रेलिग की भी बुरी येह से शतिग्रस्त हो चुकी है लेकिन किसी को परवाह नहीं।
ठेकेदार–विभाग की सांठगांठ पर उठ रहे सवाल
जनता का आरोप है कि संबंधित विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से काम में भारी लापरवाही हो रही है।
कहीं मिट्टी सही नहीं डाली जा रही,
कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया,
और कहीं सड़क का डामरीकरण ही गायब है। इसके बावजूद किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हो रही। यही वजह है कि ठेकेदार बेलगाम होकर मनमानी पर उतारू हैं।
जनता का फूटा गुस्सा
अब नागरिकों का सब्र टूट रहा है। लोग खुलेआम सवाल पूछ रहे हैं —
आखिर यह राष्ट्रीय राजमार्ग कब बनेगा? और कब तक हम टूटी-फूटी सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे? क्या जवाबदार सिर्फ दर्शक बनकर तमाशा देखते रहेंगे?
मांग – तत्काल कार्रवाई
नागरिकों ने शासन-प्रशासन से सख्त मांग की है कि—
सड़क निर्माण कार्य को तत्काल पूरा कराया जाए, लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए, और जब तक सड़क पूरी तरह तैयार न हो जाए, तब तक जनता को गुमराह करने वाली घोषणाओं पर रोक लगाई जाए।
यह सड़क अब जनता के लिए सिर्फ “यात्रा का साधन” नहीं, बल्कि “संघर्ष का प्रतीक” बन चुकी है। सवाल साफ है –
क्या कभी पूरा होगा जबलपुर–मंडला राष्ट्रीय राजमार्ग?
या फिर यह जनता की उम्मीदों का अधूरा सपना बनकर हमेशा अधर में लटका रहेगा?