मंडला में जनता के धन की होली …? विकास नहीं, जेबें गरम कर रहे धांधलीबाज!

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सड़कें टूटीं, शिक्षा-स्वास्थ्य चरमराए, बेरोजगारी चरम पर… योजनाएं सिर्फ कागज़ों में जिंदा

रेवांचल टाईम्स – मंडला, मध्यप्रदेश का मंडला जिला आज भी विकास की राह ताक रहा है। आज़ादी के सात दशक बाद भी हालात ऐसे हैं कि जनता के पैसे से विकास नहीं, बल्कि नेताओं और अधिकारियों की जेबें भरने का खेल जारी है।
जनता पूछ रही है—आखिर कब तक खेली जाएगी जनता के धन की यह होली?
धांधली और बदहाल हालात
शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त : सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता नदारद, प्राइवेट स्कूल मनमानी पर उतरे।
स्वास्थ्य सेवाएं लाचार : सरकारी अस्पतालों में सही इलाज नहीं, झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला।
सड़कें बदहाल : हर तरफ गड्ढे, मरम्मत के नाम पर केवल कागज़ी खानापूर्ति।
बेरोजगारी चरम पर : उद्योग-पर्यटन ठप, रोजगार योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित।
साक्षरता मिशन में घोटाला : कागज़ी क्रियान्वयन, बंद पड़े पुस्तकालय, झूठी परीक्षाएं।
जल जीवन मिशन और आवास योजना : भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी, लाभार्थी इंतज़ार में।
मनरेगा व पोषण आहार : पैसा और राशन दोनों में गोलमाल, समूह आर्थिक तंगी झेल रहे।
स्वच्छ भारत मिशन : गंदगी जस की तस, सफाई का पैसा जेब में।
सवालों के कटघरे में पूरा तंत्र
जनपद, जिला पंचायत, विधायक, सांसद और अफसर—सभी लापरवाह, सभी गैरजिम्मेदार!
फील्ड में कोई अधिकारी नहीं जाता।
जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन महज़ औपचारिकता।
राजस्व कार्यालय और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह अव्यवस्थित।
खनिज माफिया और अवैध कारोबारियों की चांदी, प्रशासन की चुप्पी।
जनता का गुस्सा – जन अपेक्षा
लोग साफ कह रहे हैं—जनता के धन की होली अब बंद होनी चाहिए।
सभी योजनाओं की भौतिक जांच हो।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
जिले में संपूर्ण विकास कार्य धरातल पर दिखे। निष्कर्ष: मंडला में विकास की गाड़ी कागज़ों में दौड़ रही है, जमीनी हकीकत में पहिए जाम हैं। जनता अब जाग चुकी है और सवाल कर रही है—धन की होली कब रुकेगी और असली विकास कब शुरू होगा?

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