सीवर प्रोजेक्ट बना मुसीबत – घटिया निर्माण से मंडला की सड़कें बनी खतरे का गड्ढा

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रेवांचल टाईम्स – मंडला नगर की जनता को राहत देने के नाम पर शुरू किया गया सीवर लाइन प्रोजेक्ट अब समस्या और हादसों का सबब बन चुका है। निर्माण एजेंसी एमपीयूडीसी और ठेकेदारों की मनमानी ने पूरे काम की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
घटिया ईंटें, टूटते ढक्कन – जनता की जान पर खेल
नगर और ग्रामीण इलाकों में बिछाई गई सीवर लाइन के चैंबरों पर घटिया ईंटों और सस्ते ढक्कनों का इस्तेमाल किया गया है। हालत यह है कि ढक्कन दो साल भी नहीं टिक पाए और जगह-जगह तार छोड़कर टूट रहे हैं। कई स्थानों पर लोहे की छड़ें बाहर निकल चुकी हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

चार साल बाद भी अधूरा काम
साल 2020-21 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज तक पूरा नहीं हो पाया। कहीं सीवर लाइन अधूरी है, तो कहीं बने हुए चैंबर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ईडन गार्डन मार्ग को तो चार बार तोड़कर दुबारा बनाया गया, लेकिन नतीजा वही— ढक्कन टूटे और सड़कें जर्जर।
मरम्मत का नाम पर धोखा
जनता जब शिकायत करती है, तब जाकर ठेकेदार डस्ट डालकर औपचारिक मरम्मत कर देता है। ज्ञानदीप मार्ग, लालीपुर तिराहा, बिझिया और कलेक्ट्रेट रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर जगह-जगह टूटी सड़कों और चैबरों ने आवागमन असुरक्षित कर दिया है।
करोड़ों खर्च, लेकिन हाल बेहाल
नगर पालिका ने करोड़ों रुपये खर्च कर डामरीकरण कराया, लेकिन वार्डों की गलियां दलदल और गड्ढों में तब्दील हैं। बाइक सवार रोज हादसों से बचते-बचते निकलते हैं। सड़कों की बार-बार खुदाई से नई बनी सड़कें भी उखड़ चुकी हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौन
इतनी शिकायतों और हादसों के बाद भी प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे बैठे हैं। सवाल यह है कि क्या नगरवासियों की जान की कोई कीमत नहीं? और कब तक घटिया निर्माण की आड़ में जनता को मौत के मुंह में धकेला जाता रहेगा?

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